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लोन लेने से पहले जानना ज़रूरी है कि हर महीने कितनी किस्त जाएगी और कुल कितना ब्याज देना पड़ेगा। राशि, ब्याज दर और अवधि भरते ही नतीजा सामने आ जाता है।
EMI यानी बराबर मासिक किस्त। शुरू की किस्तों में ब्याज का हिस्सा ज़्यादा और मूलधन का कम होता है, और धीरे-धीरे यह उल्टा होता जाता है। हर महीने अतिरिक्त पार्ट-पेमेंट भरने पर मूलधन जल्दी घटता है, इसलिए लोन पहले खत्म होता है और ब्याज बचता है।
सूत्र: EMI = P × r × (1+r)ⁿ ÷ ((1+r)ⁿ − 1), जहां P लोन की राशि, r मासिक ब्याज दर (सालाना ÷ 12 ÷ 100) और n महीनों की संख्या है।
₹10 लाख का लोन 9% सालाना ब्याज पर 20 साल के लिए लेने पर मासिक EMI ₹8,997 बनती है। इस पर कुल ब्याज ₹11,59,342 देना पड़ता है, यानी कुल भुगतान ₹21,59,342।
अवधि बढ़ाने से EMI घटती है, पर कुल ब्याज बढ़ जाता है। कम ब्याज दर पर लोन ट्रांसफर कराने, बड़ा डाउन-पेमेंट करने या रीनेगोशिएशन से भी EMI घट सकती है।
हां, क्योंकि अतिरिक्त रकम सीधे मूलधन घटाती है और आगे का ब्याज कम बनता है। ऊपर "हर महीने अतिरिक्त पार्ट-पेमेंट" में रकम भरकर बचत देख सकते हैं।
हां। फ्लोटिंग रेट लोन में ब्याज दर बदलने पर EMI या अवधि बदल सकती है। यह कैलकुलेटर एक तय दर मानकर हिसाब देता है।
और कैलकुलेटर
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अंतिम जांच: 16 अक्टूबर 2026। दरें और नियम बदलते रहते हैं, इसलिए फैसले से पहले आधिकारिक स्रोत या अपने सलाहकार से मिलान कर लें।