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कोई और बैंक कम ब्याज पर होम लोन दे रहा हो तो ट्रांसफर करने का फैसला फीस और बचत के हिसाब पर टिका होता है। दोनों दरें भरकर देखें कि फायदा कितना है।
ट्रांसफर में नया बैंक आपका बकाया लोन चुका देता है और आप नई दर पर EMI भरते हैं। बचत तब होती है जब ब्याज में कमी से जुड़ी कुल बचत प्रोसेसिंग फीस और बाकी खर्चों से ज़्यादा हो। यहां दोनों बैंकों में अवधि बराबर मानी है।
सूत्र: मासिक बचत = पुरानी EMI − नई EMI। कुल बचत = मासिक बचत × महीने − ट्रांसफर के खर्च। खर्च वसूलने का समय = खर्च ÷ मासिक बचत।
₹30 लाख बकाया, 15 साल बाकी, दर 9.5% से 8.6% होने पर EMI ₹31,327 से घटकर ₹29,718 हो जाती है। ट्रांसफर के खर्च ₹20,000 निकालकर कुल बचत ₹2,69,519 रहती है और खर्च करीब 1 साल 1 महीने में वसूल हो जाता है।
प्रोसेसिंग फीस, कानूनी और वैल्यूएशन शुल्क और कभी-कभी स्टाम्प ड्यूटी जैसे खर्च लग सकते हैं। नई बैंक से इनकी पूरी सूची पहले ले लें।
इसका कोई तय नियम नहीं है। जब बचत खर्च से काफी ऊपर निकले और लोन की बाकी अवधि लंबी हो, तब ट्रांसफर आम तौर पर फायदेमंद होता है।
हां, कई बार आपका मौजूदा बैंक दर घटाने पर राज़ी हो जाता है, जिसमें ट्रांसफर के खर्च नहीं लगते।
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अंतिम जांच: 16 अक्टूबर 2026। दरें और नियम बदलते रहते हैं, इसलिए फैसले से पहले आधिकारिक स्रोत या अपने सलाहकार से मिलान कर लें।