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FD में पैसा रखने से पहले यह जानना ज़रूरी है कि मैच्योरिटी पर कितना मिलेगा और टैक्स के बाद असली रिटर्न कितना रहेगा। राशि, ब्याज दर और अवधि भरें, बाकी हिसाब नीचे आ जाएगा।
ज़्यादातर बैंक FD पर ब्याज तिमाही चक्रवृद्धि से जोड़ते हैं, यानी हर तीन महीने पर ब्याज मूलधन में जुड़ता जाता है और अगले ब्याज पर ब्याज बनता है। FD का ब्याज आपकी आय में जुड़कर आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से कर के दायरे में आता है, इसलिए टैक्स के बाद का रिटर्न कम होता है।
सूत्र: मैच्योरिटी रकम = P × (1 + दर ÷ (100 × c))^(c × साल), जहां c साल में ब्याज जुड़ने की संख्या है (तिमाही में 4)।
₹5 लाख की FD 7% सालाना ब्याज पर 3 साल के लिए तिमाही चक्रवृद्धि के साथ रखने पर मैच्योरिटी रकम ₹6,15,720 होती है और कुल ब्याज ₹1,15,720 बनता है। 20% टैक्स स्लैब में टैक्स के बाद सालाना रिटर्न करीब 5.77% रह जाता है।
रिपोर्टों के मुताबिक एक बैंक से एक साल में ब्याज ₹50,000 (वरिष्ठ नागरिकों के लिए ₹1,00,000) से ज़्यादा हो तो बैंक 10% TDS काट सकता है, और PAN न देने पर 20%। यह सीमा हर बैंक के लिए अलग से गिनी जाती है। अपने बैंक से पुष्टि कर लें।
ज़्यादातर बैंक 60 साल से ऊपर के ग्राहकों को सामान्य दर से अतिरिक्त ब्याज देते हैं। ऊपर "अतिरिक्त ब्याज" में वह प्रतिशत जोड़कर नतीजा देखें।
समय से पहले FD तोड़ने पर बैंक आम तौर पर कुछ ब्याज काट लेते हैं और जुर्माना लेते हैं। FD पर लोन लेना कई बार बेहतर विकल्प होता है।
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अंतिम जांच: 16 अक्टूबर 2026। दरें और नियम बदलते रहते हैं, इसलिए फैसले से पहले आधिकारिक स्रोत या अपने सलाहकार से मिलान कर लें।