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RD में हर महीने तय रकम जमा होती है और अवधि पूरी होने पर ब्याज समेत वापस मिलती है। नियमित बचत की आदत बनाने के लिए यह आसान तरीका है।
बैंकों में RD पर ब्याज तिमाही चक्रवृद्धि से जुड़ता है और हर किस्त जमा होने की तारीख से गिना जाता है। इसलिए शुरू की किस्तों को ज़्यादा समय का ब्याज मिलता है और आखिरी किस्त को सबसे कम।
सूत्र: मैच्योरिटी रकम = हर किस्त × (1 + दर ÷ 400)^(बाकी महीने ÷ 3) का सभी किस्तों पर जोड़।
हर महीने ₹5,000 की RD 6.5% ब्याज पर 36 महीने चलाने पर कुल जमा ₹1,80,000 होती है और मैच्योरिटी पर ₹1,99,122 मिलते हैं, यानी कुल ब्याज ₹19,122।
RD में ब्याज दर पहले से तय होती है और रकम सुरक्षित मानी जाती है। SIP बाज़ार से जुड़ी होती है, इसलिए रिटर्न ऊपर-नीचे हो सकता है।
किस्त चूकने पर बैंक आम तौर पर जुर्माना लेते हैं और ज़्यादा चूक होने पर खाता बंद कर सकते हैं। नियम बैंक के हिसाब से अलग हैं।
हां, RD का ब्याज आपकी आय में जुड़ता है और आपके स्लैब के हिसाब से कर के दायरे में आता है।
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अंतिम जांच: 16 अक्टूबर 2026। दरें और नियम बदलते रहते हैं, इसलिए फैसले से पहले आधिकारिक स्रोत या अपने सलाहकार से मिलान कर लें।