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नई या पुरानी, कौन सी कर व्यवस्था आपके लिए सस्ती है? सालाना आय और कटौतियां भरें, दोनों का टैक्स साथ-साथ दिखेगा और बेहतर विकल्प बताया जाएगा।
नई कर व्यवस्था में स्लैब की दरें कम हैं पर ज़्यादातर कटौतियां नहीं मिलतीं। पुरानी व्यवस्था में दरें ऊंची हैं, पर 80C, 80D, HRA और होम लोन ब्याज जैसी कटौतियां मिलती हैं। इसलिए जिनकी कटौतियां ज़्यादा हैं उन्हें पुरानी व्यवस्था सस्ती पड़ सकती है। यह टूल दोनों का पूरा हिसाब, सरचार्ज और 4% सेस जोड़कर करता है।
सूत्र: टैक्स = स्लैब के हिसाब से टैक्स − रिबेट (धारा 87A) + सरचार्ज, फिर कुल पर 4% हेल्थ एंड एजुकेशन सेस।
₹15 लाख की सालाना वेतन आय पर, 80C में ₹1.5 लाख और 80D में ₹25,000 की कटौती मानने पर: नई कर व्यवस्था बेहतर है। नई व्यवस्था में टैक्स ₹97,500 और पुरानी में ₹2,02,800 बनता है।
रिपोर्टों के मुताबिक नई व्यवस्था में ₹12 लाख तक की कर-योग्य आय पर रिबेट मिलने से टैक्स शून्य होता है। वेतनभोगी को ₹75,000 की स्टैंडर्ड डिडक्शन भी मिलती है, इसलिए करीब ₹12.75 लाख तक की वेतन आय पर टैक्स शून्य बैठता है।
कटौतियां जितनी ज़्यादा हों, पुरानी व्यवस्था का फायदा उतना बढ़ता है। कम कटौतियों पर नई व्यवस्था आम तौर पर सस्ती पड़ती है। यह टूल दोनों का टैक्स साथ दिखाता है।
यह एक अनुमान है जो रिपोर्ट हुए स्लैब पर बना है, और इसमें खास दर वाली आय (जैसे शेयर या प्रॉपर्टी का पूंजीगत लाभ) शामिल नहीं है। टैक्स भरने से पहले आधिकारिक अधिसूचना या अपने CA से मिलान कर लें।
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अंतिम जांच: 16 अक्टूबर 2026। दरें और नियम बदलते रहते हैं, इसलिए फैसले से पहले आधिकारिक स्रोत या अपने सलाहकार से मिलान कर लें।