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वेतन में HRA मिलता हो और आप किराये पर रहते हों तो उसका एक हिस्सा टैक्स-फ्री हो सकता है। बेसिक, HRA और किराया भरकर छूट की रकम देखें।
HRA की छूट तीन रकमों में से सबसे कम होती है: असली HRA जो मिला, किराये में से बेसिक का 10% घटाकर बची रकम और बेसिक का 50% (मेट्रो) या 40% (बाकी शहर)। यह छूट सिर्फ़ पुरानी कर व्यवस्था में मिलती है।
सूत्र: छूट = न्यूनतम (असली HRA, किराया − बेसिक का 10%, बेसिक का 50% या 40%)।
₹50,000 बेसिक, ₹20,000 HRA और ₹18,000 किराये पर मेट्रो शहर में रहने वाले की छूट ‘किराया − बेसिक का 10%’ वाले नियम से तय होती है। साल भर में कुल छूट ₹1,56,000 बनती है और ₹84,000 कर के दायरे में रहता है।
दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई हमेशा 50% वाली सूची में रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक नए नियमों में बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद भी 1 अप्रैल 2026 से इस सूची में जोड़े गए हैं। अपने नियोक्ता या CA से पुष्टि कर लें।
नहीं, HRA की छूट पुरानी कर व्यवस्था में ही मिलती है। किस व्यवस्था में ज़्यादा बचत है, यह देखने के लिए इनकम टैक्स कैलकुलेटर इस्तेमाल करें।
सालाना किराया ₹1,00,000 से ज़्यादा हो तो मकान-मालिक का PAN देना होता है।
और कैलकुलेटर
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अंतिम जांच: 16 अक्टूबर 2026। दरें और नियम बदलते रहते हैं, इसलिए फैसले से पहले आधिकारिक स्रोत या अपने सलाहकार से मिलान कर लें।