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कमाई कहां जा रही है और कितना बच रहा है, यह समझने के लिए मासिक कमाई और खर्च भरें। साथ में इमरजेंसी फंड का लक्ष्य और उसे बनाने में लगने वाला समय भी मिलेगा।
50/30/20 एक सरल नियम है: कमाई का 50% ज़रूरी खर्चों पर, 30% मन के खर्चों पर और 20% बचत व निवेश पर। इमरजेंसी फंड वह रकम है जो नौकरी जाने या बीमारी जैसी मुश्किल में काम आए। इसे आम तौर पर ज़रूरी खर्च के 6 महीने जितना रखा जाता है।
सूत्र: इमरजेंसी फंड का लक्ष्य = ज़रूरी मासिक खर्च × महीनों की संख्या। बनने में लगने वाला समय = कमी ÷ हर महीने की बचत।
₹60,000 की कमाई में ₹30,000 ज़रूरी और ₹15,000 मन के खर्च हों तो हर महीने ₹15,000 बचते हैं। 6 महीने का इमरजेंसी फंड ₹1,80,000 का होगा।
ऐसी जगह जहां से ज़रूरत पड़ने पर पैसा आसानी से निकल सके, जैसे सेविंग्स खाता या लिक्विड फंड। ऊंचे जोखिम वाले निवेश में इमरजेंसी फंड नहीं रखा जाता।
यह एक मोटा नियम है। कम कमाई में ज़रूरी खर्च 50% से ज़्यादा हो सकते हैं। असल बात यह है कि हर महीने कुछ बचत ज़रूर हो।
चल रहे लोन की EMI को ज़रूरी खर्च में गिनना ठीक है, क्योंकि उसे चुकाना ही पड़ता है।
और कैलकुलेटर
अंतिम जांच: 16 अक्टूबर 2026। दरें और नियम बदलते रहते हैं, इसलिए फैसले से पहले आधिकारिक स्रोत या अपने सलाहकार से मिलान कर लें।