डिजिटल डीमैट अकाउंट्स के बढ़ने से कैसे बदल रही है भारतीय निवेशकों की तस्वीर

डिजिटल डीमैट अकाउंट्स के बढ़ने से कैसे बदल रही है भारतीय निवेशकों की तस्वीर

भारत में व्यक्तिगत निवेशकों द्वारा डिजिटल डीमैट अकाउंट खोलने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव आया है। जयपुर, इंदौर, कोची या पुणे का कोई भी नया निवेशक अब केवल अपने मोबाइल फोन, बुनियादी दस्तावेजों और वित्तीय जिज्ञासा के साथ शुरुआत कर सकता है।

पहले भारतीय शेयर बाजार में निवेश को काफी कठिन माना जाता था और इसके लिए फॉर्म, दस्तखत, ब्रोकर ऑफिस तथा पेपर स्टेटमेंट की जरूरत पड़ती थी। अब यह माहौल पूरी तरह बदल चुका है और डिजिटल पहुंच ने इस प्रक्रिया को बहुत आसान बना दिया है।

  • डीमैट अकाउंट सिक्योरिटीज को इलेक्ट्रॉनिक रूप में सुरक्षित रखता है।
  • भारत में डीमैट अकाउंट NSDL और CDSL जैसे डिपॉजिटरीज के माध्यम से काम करते हैं।
  • नया निवेशक अब मोबाइल फोन और बुनियादी दस्तावेजों से शुरुआत कर सकता है।
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने अकाउंट खोलने की प्रक्रिया को काफी सरल बना दिया है।
  • छोटे शहरों के निवेशक भी डिजिटल ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स का उपयोग कर रहे हैं।

डिजिटल डीमैट अकाउंट क्या है और यह कैसे काम करता है

एक डीमैट अकाउंट सिक्योरिटीज को इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म में रखता है। इसमें पेपर शेयर सर्टिफिकेट मिलने के बजाय होल्डिंग्स डिजिटल रूप में दिखाई देती हैं।

इस अकाउंट में शेयर, ETFs, बॉन्ड और कुछ अन्य मार्केट-लिंक्ड इंस्ट्रूमेंट्स रखे जा सकते हैं। भारत में डीमैट अकाउंट रजिस्टर्ड Depository Participants के माध्यम से NSDL और CDSL जैसे डिपॉजिटरीज के जरिए काम करते हैं।

डिजिटल KYC प्रक्रिया से अकाउंट खोलना हुआ आसान

पहले अकाउंट खोलना किसी बैंक की शाखा का काम लगता था जिसमें फिजिकल फॉर्म भरने और दस्तावेजों की प्रतियां लगाने की जरूरत होती थी। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने इस झंझट को काफी कम कर दिया है।

आज की सामान्य प्रक्रिया में निवेशक ऑनलाइन व्यक्तिगत विवरण दर्ज करते हैं।

  • पैन, आधार से जुड़ा मोबाइल वेरिफिकेशन और बैंक विवरण जमा किए जाते हैं।
  • दस्तावेज डिजिटल रूप से अपलोड किए जाते हैं।
  • घर से वीडियो वेरिफिकेशन पूरा किया जा सकता है।
  • अप्रूवल के बाद लॉगिन विवरण साझा किए जाते हैं।

छोटे शहरों तक पहुंचा मार्केट का दायरा

डिजिटल फाइनेंस का विकास मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु से आगे भी दिखाई दे रहा है। टियर-2 और टियर-3 शहरों के निवेशक अब मोबाइल बैंकिंग, UPI, म्यूचुअल फंड ऐप्स और ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स का उपयोग करने में अधिक सहज हैं।

यह व्यापक भागीदारी तीन कारणों से संभव हुई है।

  • सस्ते स्मार्टफोन्स ने पहुंच को बेहतर बनाया है।
  • वित्तीय सामग्री सरल भाषा में उपलब्ध है।
  • युवा परिवार के सदस्य बुजुर्ग रिश्तेदारों की डिजिटल शुरुआत में मदद करते हैं।

अकाउंट खोलते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए

डीमैट अकाउंट खोलना पहले से आसान हो गया है, लेकिन निवेश के लिए अब भी अनुशासन की जरूरत होती है। नए निवेशकों को अकाउंट को त्वरित रिटर्न का शॉर्टकट नहीं मानना चाहिए।

निवेश करने से पहले इन बातों की जांच करना जरूरी है।

  • ब्रोकर या Depository Participant रजिस्टर्ड है या नहीं।
  • वार्षिक रखरखाव, ब्रोकरेज और ट्रांजैक्शन चार्ज कितने लगते हैं।
  • नॉमिनी को जोड़ा गया है या नहीं।
  • SMS और ईमेल अलर्ट एक्टिव हैं या नहीं।
  • निवेश उनकी जोखिम क्षमता से मेल खाता है या नहीं।
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