छोटे म्यूचुअल फंड हाउस बढ़ा रहे अपनी हिस्सेदारी, टॉप 10 एएमसी का मार्केट शेयर घटकर 71.3 प्रतिशत पर आया

देश के एक्टिवली मैनेज्ड इक्विटी म्यूचुअल फंड बाजार में छोटे और मझोले म्यूचुअल फंड हाउसों की स्थिति मजबूत हो रही है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विपमेंट्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, फाइनेंशियल ईयर 2027 के पहले चार महीनों में टॉप 10 एसेट मैनेजमेंट कंपनियों का मार्केट शेयर गिरकर 71.3 प्रतिशत पर आ गया है। यह आंकड़ा फाइनेंशियल ईयर 2025 में 73 प्रतिशत दर्ज किया गया था।
रिपोर्ट के मुताबिक इस बदलाव के पीछे बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, फंड के प्रदर्शन में अंतर और बदलती डिस्ट्रीब्यूशन व्यवस्था मुख्य कारण हैं। डेटा से यह भी पता चलता है कि फाइनेंशियल ईयर 2014 में टॉप 10 एएमसी के पास एक्टिवली मैनेज्ड इक्विटी ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड के औसत एसेट्स अंडर मैनेजमेंट का 85.2 प्रतिशत हिस्सा था। इस अवधि में बाकी खिलाड़ियों की हिस्सेदारी बढ़कर 12.5 प्रतिशत हो गई, जो पहले 11.2 प्रतिशत थी।
म्यूचुअल फंड बाजार में छोटे खिलाड़ियों की बढ़ती हिस्सेदारी
- फाइनेंशियल ईयर 2027 के पहले चार महीनों में टॉप 10 एएमसी का मार्केट शेयर 71.3 प्रतिशत रहा।
- फाइनेंशियल ईयर 2025 में टॉप 10 एएमसी के पास 73 प्रतिशत मार्केट शेयर था।
- फाइनेंशियल ईयर 2014 में टॉप 10 एएमसी की हिस्सेदारी 85.2 प्रतिशत थी।
- बाकी खिलाड़ियों की हिस्सेदारी 11.2 प्रतिशत से बढ़कर 12.5 प्रतिशत हो गई है।
बड़े एएमसी को ऐतिहासिक रूप से मजबूत ब्रांड, बड़े पैमाने और व्यापक डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का फायदा मिलता रहा है। हालांकि, कोटक की रिपोर्ट बताती है कि हालिया फ्लो ट्रेंड से यह स्पष्ट है कि छोटे खिलाड़ी बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। निवेशकों का नया पैसा कहां जाएगा, यह अब फंड के प्रदर्शन पर अधिक निर्भर करता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जब किसी छोटे फंड हाउस की एक या दो स्कीमें बहुत अच्छा प्रदर्शन करती हैं, तो उन्हें बहुत बड़े पैमाने पर इनफ्लो मिलता है। ब्रोकरेज ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि प्रदर्शन कमजोर होता है, तो ये लाभ वापस भी जा सकते हैं। बड़े खिलाड़ियों के लिए यह स्थिति एक लंबे समय का प्रतिस्पर्धात्मक जोखिम बनी हुई है।
म्यूचुअल फंड फ्लो और निवेशकों का व्यवहार
बाजार में यह बदलाव तब हो रहा है जब कुल म्यूचुअल फंड फ्लो में स्थिरता बनी हुई है। भारतीय एएमसी रिटेल निवेशकों और इक्विटी पर अत्यधिक निर्भर हैं, जिसके कारण बाजार का रिटर्न एक महत्वपूर्ण जोखिम बना हुआ है। हालांकि, एसआईपी फ्लो के कारण निवेशकों का व्यवहार अभी तक स्थिर बना रहा है।
डिस्ट्रीब्यूशन व्यवस्था में भी बदलाव देखे जा रहे हैं। बड़े डिस्ट्रीब्यूटरों ने बड़े एएमसी से अधिक कमीशन शेयर लिया है, जिसके कारण अधिक इनफ्लो छोटे और बेहतर प्रदर्शन करने वाले फंड हाउसों की तरफ जा सकता है। इस पूरी प्रवृत्ति से म्यूचुअल फंड उद्योग में प्रतिस्पर्धा धीरे-धीरे व्यापक हो रही है।