स्मॉलकैप स्टॉक निफ्टी 50 से लगभग दोगुने महंगे, वीके विजयकुमार ने दी जानकारी

भारतीय शेयर बाजार में लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों की वैलुएशंस में एक असामान्य अंतर देखा जा रहा है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटजिस्ट वीके विजयकुमार ने एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में यह बात कही है। उन्होंने बताया कि स्मॉलकैप स्टॉक निफ्टी 50 के मुकाबले वैलुएशन के मामले में लगभग दोगुने महंगे हैं।
वीके विजयकुमार के अनुसार, इस समय बाजार में वैलुएशंस को लेकर एक बहुत बड़ा अंतर बना हुआ है। उन्होंने कहा कि वैलुएशंस में इस तरह के बदलाव या अंतर बहुत दुर्लभ होते हैं। सामान्य और स्थिर बाजार में आमतौर पर लार्जकैप का प्रीमियम मिडकैप पर और मिडकैप का प्रीमियम स्मॉलकैप पर होता है, लेकिन वर्तमान में स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है।
बाजार के इस रुख और वैलुएशन के अंतर को लेकर वीके विजयकुमार ने कई अहम बातें साझा की हैं।
- स्मॉलकैप स्टॉक निफ्टी 50 की तुलना में वैलुएशन के मामले में लगभग दोगुने महंगे कारोबार कर रहे हैं।
- निफ्टी 50 का ट्रेलिंग प्राइस-टू-अर्निंग्स यानी पीई मल्टीपल 19.7 है।
- निफ्टी मिडकैप 100 का पीई मल्टीपल 29.9 है।
- निफ्टी 100 स्मॉलकैप इंडेक्स का पीई मल्टीपल लगभग 34.4 है।
- एफआइआई ने पिछले साल लगभग 19 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य की भारतीय इक्विटी बेची थी।
- वित्तीय वर्ष 2027 में लगभग 7 प्रतिशत की जीडीपी ग्रोथ हासिल की जा सकती है।
वैलुएशंस में अंतर और ग्रोथ स्टॉक पर फोकस
वीके विजयकुमार ने बताया कि यह अंतर आंशिक रूप से निवेशकों का ग्रोथ स्टॉक पर मजबूत फोकस होने के कारण है। निवेशक इस समय वैल्यू स्टॉक की तुलना में ग्रोथ स्टॉक पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। इससे लंबी ग्रोथ संभावना वाली कंपनियों को ऊंचे वैलुएशंस हासिल करने में मदद मिली है।
उन्होंने डिजिटल और नए जमाने के प्लेटफॉर्म कंपनियों का उदाहरण देते हुए कहा कि इनके ऊंचे वैलुएशंस को आने वाले वर्षों में लंबे ग्रोथ पाथ की उम्मीदों का आंशिक समर्थन मिला है। लार्जकैप एक तरफ और मिड व स्मॉलकैप दूसरी तरफ होने का यही कारण है।
वैलुएशन का अंतर और एफआइआई की भूमिका
वर्तमान वैलुएशन का अंतर अनिश्चितकाल तक नहीं रह सकता है। उन्होंने एवरेज वैलुएशंस की तरफ वापसी के बाजार कॉन्सेप्ट का जिक्र किया। लार्जकैप के कुछ सेगमेंट जैसे बैंकिंग मेजर, फाइनेंशियल मेजर, कैपिटल गुड्स मेजर और कुछ डाइव्हर्सिफाइड कंपनियां बढ़ रही हैं और इसलिए वे बहुत अधिक वैलुएशन के हकदार हैं।
विजयकुमार के अनुसार, इस प्रक्रिया में विदेशी निवेशकों का फ्लो एक महत्वपूर्ण कारक होगा। एफआइआई ने इस साल जुलाई और अगस्त में खरीदार बनने के बाद सितंबर में फिर से बिकवाल बन गए। यदि भारतीय अर्थव्यवस्था में ग्रोथ मोमेंटम और अर्निंग्स ग्रोथ की संभावनाएं अच्छी रहती हैं और कच्चे तेल की कीमतों तथा बॉन्ड यील्ड में गिरावट के कारण एफआइआई खरीदार बन सकते हैं।
घरेलू आर्थिक आउटलुक और ग्रोथ
भारत का घरेलू आर्थिक आउटलुक सपोर्टिव बना हुआ है। वित्तीय वर्ष 2027 में लगभग 7 प्रतिशत की जीडीपी ग्रोथ हासिल की जा सकती है। इसके अलावा निफ्टी अर्निंग्स ग्रोथ 12 से 14 प्रतिशत संभव है।