सितंबर में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.47 प्रतिशत पहुंचने का अनुमान, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में दावा

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (UBI) की एक रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर महीने में भारत की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.47 प्रतिशत हो सकती है। अगस्त महीने में यह दर 4.82 प्रतिशत दर्ज की गई थी। इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह खाद्य पदार्थों की कीमतों में हुई तेज बढ़त को बताया गया है।
रिपोर्ट का अनुमान है कि सितंबर में खाद्य महंगाई दर बढ़कर 7.35 प्रतिशत हो जाएगी, जबकि अगस्त में यह 5.66 प्रतिशत थी। इस वृद्धि में सब्जियों की कीमतें सबसे बड़ा योगदान दे रही हैं। अनुमानित बढ़ोतरी के कारण हेडलाइन इन्फ्लेशन दिसंबर 2024 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच जाएगी और यह RBI के संतोषजनक स्तर से काफी ऊपर होगी।
- सितंबर में खुदरा महंगाई दर 5.47 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
- अगस्त महीने में खुदरा महंगाई दर 4.82 प्रतिशत दर्ज की गई थी।
- खाद्य महंगाई दर सितंबर में बढ़कर 7.35 प्रतिशत होने का अनुमान है।
- सब्जी की महंगाई दर सितंबर में बढ़कर 9.34 प्रतिशत हो गई है।
- कोर इन्फ्लेशन सितंबर में 4.48 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।
खाद्य पदार्थों और सब्जियों की कीमतों में तेज उछाल
रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर में सब्जियों की महंगाई दर अगस्त के 0.99 प्रतिशत से उछलकर 9.34 प्रतिशत पर पहुंच गई है। डिपार्टमेंट ऑफ कंज्यूमर अफेयर्स के डेटा के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि महीने के दौरान प्याज की कीमतों में लगभग 34 प्रतिशत की तेजी आई, जिसने सब्जियों के दाम बढ़ाने में बड़ा योगदान दिया।
खाद्य पदार्थों की महंगाई का असर अन्य श्रेणियों में भी फैल रहा है। UBI का अनुमान है कि सितंबर में अनाजों की महंगाई दर अगस्त के 2.82 प्रतिशत से बढ़कर 3.75 प्रतिशत हो जाएगी। इसके अलावा, दालों की महंगाई दर 3.06 प्रतिशत से बढ़कर 4.19 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। चीनी, खाद्य तेल और दूध की कीमतें भी स्थिर बनी हुई हैं।
महंगाई बढ़ने के अन्य कारण और वैश्विक कारक
रिपोर्ट में महंगाई बढ़ने के पीछे लंबे समय से जारी सप्लाई में रुकावट, अधिक ऊर्जा लागत, वैश्विक चिप की कीमतों में बढ़ोतरी और सुपर अल नीनो के संभावित प्रभावों को जिम्मेदार बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सुपर अल नीनो की घटना और युद्ध के कारण सप्लाई बाधित होने से खाद्य महंगाई जनवरी 2026 के 2.12 प्रतिशत से तेजी से बढ़कर अगस्त 2026 में 5.66 प्रतिशत हो गई है और यह अब स्थिर बनी हुई है, जबकि पिछले साल का निचला आधार भी इसमें असर डाल रहा है।
मौसम की स्थिति भी खाद्य कीमतों पर दबाव बढ़ा सकती है। दक्षिण-पश्चिम मानसून का जून-सितंबर 2026 सीजन लंबी अवधि के औसत से 13 प्रतिशत कम बारिश के साथ समाप्त हुआ, जबकि जलाशयों का स्तर एक साल पहले के 92 प्रतिशत की तुलना में 72 प्रतिशत पर रहा। कुल खरीफ फसलों की बुआई पिछले वर्ष के स्तर से लगभग 1 प्रतिशत कम रही, जिसमें धान की बुआई में लगभग 3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
कोर इन्फ्लेशन और आरबीआई का कंफर्ट लेवल
अस्थिर घटकों को हटाने वाली कोर इन्फ्लेशन भी सितंबर में अगस्त के 4.44 प्रतिशत से बढ़कर 4.48 प्रतिशत होने की उम्मीद है। इससे यह संकेत मिलता है कि कीमतों का दबाव केवल खाद्य पदार्थों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा बढ़ रहा है।
UBI ने कहा कि कीमतों में यह व्यापक बढ़ोतरी इस बात का संकेत देती है कि सप्लाई के झटके धीरे-धीरे व्यापक महंगाई बास्केट में शामिल हो रहे हैं। बैंक ने यह भी कहा कि खाद्य और अन्य कीमतों के दबाव का बने रहना आने वाले महीनों में महंगाई के दृष्टिकोण के लिए एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय रहेगा।