आरबीआई पर अक्टूबर में रेट हाइक का दबाव बढ़ सकता है, यस बैंक की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

भारतीय रिजर्व बैंक को अक्टूबर की शुरुआत में ही interest rate बढ़ाने के लिए बढ़े हुए pressure का सामना करना पड़ सकता है। यस बैंक की एक research report के अनुसार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख अपनाने और भारत-अमेरिका interest rate differential के और कम होने के कारण यह स्थिति बन सकती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि RBI rate hike की probability बढ़ गई है, हालांकि central bank का निर्णय घरेलू growth और inflation dynamics पर ही निर्भर करेगा। वैश्विक स्तर पर crude prices में मजबूती, अगस्त में headline CPI का बढ़ना और core inflation में वृद्धि RBI के इस कदम का आधार बन सकती है।
- यूएस फेडरल रिजर्व ने policy rate को 25 basis points बढ़ाकर 3.75-4 प्रतिशत की target range में कर दिया है।
- फेड ने 2026 के लिए inflation और growth projections को बढ़ाया है जबकि unemployment forecast को घटाया है।
- अगस्त में नॉनफार्म पेरोल 162,000 बढ़ा और जुलाई में job openings बढ़कर 7.27 मिलियन हो गईं।
- भारत में interest rate differential कम होने से currency market पर दबाव बढ़ रहा है और FPIs की तरफ से net outflows जारी हैं।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले और अनुमान
यस बैंक की report के अनुसार, यूएस फेडरल रिजर्व ने 12-0 के unanimous decision में अपना policy rate 25 basis points बढ़ाया है। फेड ने अपने dot plot और inflation के ऊंचे स्तर पर बने रहने के आकलन का हवाला देते हुए December 2026 में एक और 25-basis-point rate hike की उम्मीद जताई है।
फेड ने 2026 के GDP growth projection को बढ़ाकर 2.3 प्रतिशत कर दिया है जो पहले 2.2 प्रतिशत था। बेरोजगारी का अनुमान 4.3 प्रतिशत से घटाकर 4.1 प्रतिशत कर दिया गया है। 2026 PCE inflation projection को 3.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 3.7 प्रतिशत किया गया है और core PCE inflation को 3.3 प्रतिशत से संशोधित करके 3.4 प्रतिशत किया गया है।
भारतीय बाजार पर संभावित प्रभाव
रिपोर्ट में बताया गया है कि किसी भी rate hike की effectiveness RBI की surplus liquidity को absorb करने की क्षमता पर निर्भर करेगी। वर्तमान में weighted average call rate यानी WACR 5.05 प्रतिशत पर है।
यस बैंक का कहना है कि वह October repo rate action पर कोई पक्का विचार बनाने से पहले RBI के liquidity absorption measures की सफलता पर नजर रखेगा। भारत के लिए, narrowing interest rate differential घरेलू currency market पर दबाव बढ़ा रहा है जबकि foreign portfolio investors द्वारा net outflows लगातार देखे जा रहे हैं।