RBI rate hike की आशंका: क्रूड ऑयल के झटके से 75-100 bps तक बढ़ सकती हैं ब्याज दरें

ग्लोबल मौद्रिक नीति व्यवस्था अब एक सख्त दौर में प्रवेश कर रही है। प्रमुख केंद्रीय बैंक पिछले दशक की अति-ढीली स्थितियों से दूर हो रहे हैं। यदि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बनी रहती हैं, तो भारत को 75 से 100 बेसिस पॉइंट्स की संचयी रेट हाइक का सामना करना पड़ सकता है। यह बात ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal Financial Services ने अपनी एक रिसर्च रिपोर्ट में कही है।
ब्रोकरेज का कहना है कि यदि क्रूड का स्तर ऊंचा रहता है और महंगाई की उम्मीदें बढ़ने लगती हैं, तो Reserve Bank of India यानी RBI द्वारा अक्टूबर में रेट हाइक किए जाने की सार्थक संभावना है। रिपोर्ट के अनुसार, FY27 की शेष अवधि के लिए 10-year Indian government bond yield की 7.0 से 7.2 प्रतिशत की रेंज का पूर्वानुमान बरकरार रखा गया है। वहीं, FY27 CPI inflation का अनुमान 5.1 प्रतिशत लगाया गया है, जो RBI के 5 प्रतिशत के अनुमान से थोड़ा अधिक है।
- Brent crude की कीमत इस हफ्ते की शुरुआत के 103 USD प्रति बैरल से ऊपर 108 से 110 USD से नरम होकर करीब 103 USD प्रति बैरल पर आ गई है।
- Food inflation लगभग 6 प्रतिशत के करीब है, जबकि WPI inflation लगभग 10 प्रतिशत के पास है।
- ब्रोकरेज को उम्मीद है कि FY27 की तीसरी तिमाही में फूड और एनर्जी का दबाव CPI inflation को 6 प्रतिशत से ऊपर धकेल देगा।
- US Federal Reserve ने सितंबर में अपनी पॉलिसी रेट 25 बेसिस पॉइंट्स बढ़ाई है, जिससे federal funds target range 3.75 से 4 प्रतिशत हो गई है।
- US 10-year Treasury yields 5 प्रतिशत के करीब पहुंच गई हैं, जबकि भारत की 10-year yield 7 प्रतिशत से ऊपर बढ़ गई है।
ग्लोबल स्तर पर सख्त हो रही मौद्रिक नीतियां और वैश्विक कारण
ब्रोकरेज फर्म के अनुसार, US Federal Reserve के अलावा European Central Bank और Bank of Japan ने भी सख्त नीति की तरफ कदम बढ़ाए हैं। Bank of England ने अपनी दर को बरकरार रखा है लेकिन एक सख्त रुख वाला वोट दिया है। यह बदलाव लगातार बनी हुई महंगाई, ऊंचे public debt, बड़े fiscal deficits और कोविड से पहले के स्तर से काफी ऊपर बने रहने वाले monetary aggregates के कारण हो रहा है। Motilal Oswal का यह भी कहना है कि ग्लोबल इकोनॉमी प्रचुर और सस्ती पूंजी के युग से हटकर सख्त तथा महंगे पैसों के दौर की ओर बढ़ेगी।
भारत में वित्तीय स्थितियां और भारतीय क्षेत्रों पर प्रभाव
Motilal Oswal का यह भी कहना है कि औपचारिक repo-rate हाइक साइकिल शुरू होने से पहले ही भारत में financial conditions पहले से ही सख्त हो रही हैं। इसका कारण RBI द्वारा variable rate reverse repo operations यानी VRRR, open market operation यानी OMO बिक्री, घरेलू बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और वैश्विक वित्तीय स्थितियों का सख्त होना है। भारतीय क्षेत्रों पर इसका प्रभाव असमान रहने की उम्मीद है। Banks को शुरुआत में अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति मिल सकती है क्योंकि उनके floating-rate assets रीप्राइस होते हैं। दूसरी ओर, NBFCs, रियल एस्टेट, ऑटो, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और अत्यधिक कर्ज वाले व्यवसायों को फंडिंग लागत बढ़ने से अधिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है। निर्यात-उन्मुख IT और फार्मास्युटिकल कंपनियों को कमजोर rupee से कुछ समर्थन मिल सकता है, हालांकि IT क्षेत्र धीमी वैश्विक तकनीक खर्च के प्रभाव के दायरे में बना हुआ है।