RBI के ब्याज दर बढ़ाने के चक्र में 50-75 bps की बढ़ोतरी संभव, रिपोर्ट में हुआ खुलासा

RBI के ब्याज दर बढ़ाने के चक्र में 50-75 bps की बढ़ोतरी संभव, रिपोर्ट में हुआ खुलासा

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ( RBI ) द्वारा ब्याज दरों में आगे की बढ़ोतरी की सीमा लगातार बनी रहने वाली महंगाई और क्रूड ऑयल की कीमतों पर निर्भर करेगी। घरेलू ब्रोकरेज फर्म JM Financial की एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, मौद्रिक सख्ती का यह चक्र 50 से 75 basis points पर सीमित रहने की उम्मीद है।

ब्रोकरेज ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में बताया है कि चालू वित्त वर्ष की October-December तिमाही में महंगाई बढ़ने की संभावना है। ऐसे में खाद्य कीमतों के दबाव को पूरी अर्थव्यवस्था में फैलने से रोकने के लिए समय पर supply-side हस्तक्षेप करना बहुत जरूरी होगा।

  • JM Financial की रिपोर्ट के मुताबिक मौद्रिक सख्ती का चक्र 50-75 bps रहने की उम्मीद है।
  • सितंबर महीने में खुदरा महंगाई बढ़कर 5.54 प्रतिशत हो गई जो अगस्त में 4.82 प्रतिशत थी।
  • लगातार पांचवें महीने खाद्य महंगाई मुख्य कारक रही और यह बढ़कर 7.7 प्रतिशत पर पहुंच गई।
  • FY27 की जुलाई-सितंबर तिमाही में महंगाई औसतन 4.9 प्रतिशत रही जो RBI के अनुमान के अनुरूप थी।
  • October-December तिमाही में महंगाई के 6 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान है।

महंगाई के आंकड़े और आगे का अनुमान

सितंबर महीने में खुदरा महंगाई बढ़कर 5.54 प्रतिशत हो गई जो अगस्त के महीने में 4.82 प्रतिशत थी। यह नवंबर 2024 के बाद से इसका सबसे उच्च स्तर है। खाद्य महंगाई लगातार पांचवें महीने इसकी मुख्य वजह रही और यह बढ़कर 7.7 प्रतिशत हो गई जबकि कीमतों में महीने-दर-महीने 1.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

JM Financial ने बताया कि FY27 की जुलाई-सितंबर तिमाही के दौरान महंगाई औसतन 4.9 प्रतिशत रही जो RBI के अनुमानों के बिल्कुल अनुकूल थी। हालांकि, ब्रोकरेज का अनुमान है कि October-December तिमाही में महंगाई बढ़कर 6 प्रतिशत हो जाएगी और उसके बाद जनवरी-मार्च तिमाही में घटकर 5.7 प्रतिशत पर आ जाएगी।

कृषि क्षेत्र के जोखिम और खाद्य महंगाई का दबाव

ब्रोकरेज ने इस बात पर प्रकाश डाला है कि कम बारिश, जलाशयों में घटता जल स्तर और कमजोर खरीफ बुवाई से विशेष रूप से ग्रामीण भारत में खाद्य महंगाई का दबाव और अधिक बढ़ सकता है। 30 सितंबर तक अखिल भारतीय स्तर पर वर्षा दीर्घकालिक औसत से 13 प्रतिशत कम रही, जबकि 2 अक्तूबर तक खरीफ बुवाई में 1.1 प्रतिशत की गिरावट आई।

ब्रोकरेज ने चेतावनी दी है कि खाद्य कीमतों के दबाव को अर्थव्यवस्था में फैलने से रोकने के लिए उस पर कड़ी नजर रखना आवश्यक है। रिपोर्ट में कहा गया है कि October'26 में RBI द्वारा दर वृद्धि को पहले ही लागू करने के बावजूद खाद्य महंगाई पर अंकुश लगाने के लिए समय पर supply intervention का उपयोग किया जाना चाहिए।

कोर महंगाई और अन्य आर्थिक कारक

अस्थिर खाद्य और ईंधन कीमतों को छोड़कर निकाली जाने वाली कोर महंगाई सितंबर में बढ़कर 4.39 प्रतिशत हो गई। रेस्टोरेंट और प्रोसेस्ड फूड श्रेणियों में भी महंगाई का दबाव लगातार बना रहा, जिसमें रेस्टोरेंट की महंगाई लगातार छठे महीने उच्च स्तर पर रही जो West Asia संकट से जुड़ी supply बाधाओं को दर्शाती है।

JM Financial ने कहा कि यदि क्रूड ऑयल की कीमतें लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनी रहती हैं, तो सरकार को foreign institutional investor प्रवाह को आकर्षित करने के लिए वित्तीय उपायों का मूल्यांकन करना चाहिए। ब्रोकरेज को यह भी उम्मीद है कि RBI बैंकिंग प्रणाली से अतिरिक्त liquidity को तब तक निकालता रहेगा जब तक overnight call rates रेपो रेट के अनुरूप नहीं हो जाते।

El Nino की स्थिति और कृषि उत्पादन पर असर

ब्रोकरेज ने फरवरी 2027 तक El Nino की स्थिति बने रहने की संभावना की ओर भी इशारा किया है। इसके साथ ही जलाशयों के घटते स्तर ने कृषि उत्पादन और अगली मानसून सीजन पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

ये जोखिम खाद्य महंगाई को दबाव में रख सकते हैं और आने वाले महीनों में RBI के मौद्रिक नीति निर्णयों को प्रभावित कर सकते हैं।

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