फेडरल रिजर्व की 25 bps रेट हाइक और 100 डॉलर से ऊपर क्रूड ऑयल के चलते आरबीआई पर आ सकता है सख्त मॉनेटरी पॉलिसी का दबाव

फेडरल रिजर्व की 25 bps रेट हाइक और 100 डॉलर से ऊपर क्रूड ऑयल के चलते आरबीआई पर आ सकता है सख्त मॉनेटरी पॉलिसी का दबाव

अमेरिकी सेंट्रल बैंक यानी यूएस फेडरल रिजर्व द्वारा दरों में की गई बढ़ोतरी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिल सकता है। यूएस फेडरल रिजर्व द्वारा फेडरल फंड्स टारगेट रेंज को 25 basis points बढ़ाकर 3.75-4 प्रतिशत कर दिया गया है जो 2023 के बाद पहली दर वृद्धि है। मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार इस फैसले और लगातार बनी हुई महंगाई के कारण भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई पर मॉनेटरी पॉलिसी को सख्त करने का दबाव बढ़ सकता है।

फेड का कहना है कि महंगाई अभी भी उच्च स्तर पर बनी हुई है जबकि मजबूत घरेलू खर्च और पूंजीगत निवेश के समर्थन से आर्थिक गतिविधि मजबूत गति से आगे बढ़ रही है। फेड के इस कदम और 2026 में एक और दर वृद्धि के संकेत से वैश्विक ब्याज दरें ऊंची बनी रहेंगी जिससे भारत के नीतिगत फैसलों पर भी असर पड़ना तय माना जा रहा है। घरेलू स्तर पर दरों में बढ़ोतरी का समय अभी अनिश्चित बना हुआ है लेकिन वैश्विक परिस्थितियां नए संकेत दे रही हैं।

  • यूएस फेडरल रिजर्व ने फेडरल फंड्स टारगेट रेंज को 25 basis points बढ़ाकर 3.75-4 प्रतिशत किया।
  • फेड ने 2026 में एक और दर वृद्धि का संकेत दिया है ताकि महंगाई को 2 प्रतिशत के लक्ष्य तक लाया जा सके।
  • क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं।
  • भारत में महंगाई लगातार 4 प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है और इसमें ऊपर की ओर दबाव बना हुआ है।
  • फेड के इन फैसलों से भारतीय बॉंड यील्ड, रुपया और विदेशी पोर्टफोलियो प्रवाह प्रभावित हो सकते हैं।

फेडरल रिजर्व के फैसलों का वैश्विक और घरेलू अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

कोटक म्यूचुअल फंड के CIO-Debt & Head Products दीपक अग्रवाल के अनुसार फेडरल रिजर्व का यह फैसला और 2026 में एक और दर वृद्धि का मार्गदर्शन वैश्विक दरों को ऊंचा रखेगा। दीपक अग्रवाल ने बताया कि उच्च महंगाई के चलते FOMC ने दरों में 25 bps की बढ़ोतरी की है जिससे FOMC की विश्वसनीयता को बहाल करने और महंगाई को 2 प्रतिशत के लक्ष्य तक लाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि बढ़ती क्रूड ऑयल की कीमतें और वैश्विक दरों के बढ़ने से भारत की MPC को भी दरों में 50 bps की बढ़ोतरी करने का मार्गदर्शन मिल सकता है。

ओम्निसाइंस कैपिटल के CEO & Strategist विकास गुप्ता ने दोनों अर्थव्यवस्थाओं में लगातार बने हुए महंगाई के दबाव का जिक्र किया। विकास गुप्ता ने कहा कि भारत की महंगाई भी लगातार 4 प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है और इसमें ऊपर की ओर दबाव है जिसके चलते उच्च तेल की कीमतें और कमजोर रुपया मिलकर आरबीआई को अगली बैठक में दर बढ़ाने पर विचार करने के लिए मजबूर कर सकते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आरबीआई द्वारा तुरंत दरें बढ़ाए जाने की कोई निश्चितता नहीं है और सेंट्रल बैंक पहले एक सख्त रुख अपना सकता है तथा बाद की बैठक में दरों में वृद्धि कर सकता है।

बाजार की चाल और आगामी मॉनेटरी पॉलिसी का रुख

एक्सिस डायरेक्ट के Head of Research राजेश पालिवा के अनुसार फेडरल रिजर्व का यह कदम सख्त मॉनेटरी स्थितियों की ओर एक नए बदलाव का संकेत देता है। राजेश पालिवा ने बताया कि अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और डॉलर इसके चलते मजबूत बने रह सकते हैं जबकि भारत के संदर्भ में ऊंची अमेरिकी यील्ड, मजबूत डॉलर और 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर के क्रूड ऑयल के कारण रुपये पर दबाव बना रह सकता है।

इस स्थिति में घरेलू बॉंड यील्ड भी उच्च बनी रह सकती है और विदेशी पोर्टफोलियो प्रवाह में उतार-चढ़ाव देखा जा सकता है। नियर टर्म में इक्विटी बाजारों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है लेकिन यदि तेल की कीमतें स्थिर हो जाती हैं और फेड द्वारा सीमित सख्त चक्र का संकेत दिया जाता है तो बाजार का ध्यान धीरे-धीरे फिर से घरेलू कमाई और ग्रोथ पर केंद्रित हो सकता है। फेडरल रिजर्व का यह ताजा निर्णय और आगे की दरों को लेकर उसका मार्गदर्शन वैश्विक उधार लागत और भारत में नीतिगत दृष्टिकोण के लिए मुख्य कारक बने रहने की संभावना है।

Share:

Comments

Leave a comment