आरबीआई भविष्य में कर सकता है इंटरेस्ट रेट में और बढ़ोतरी, कोटक सिक्योरिटीज ने दी जानकारी

आरबीआई भविष्य में कर सकता है इंटरेस्ट रेट में और बढ़ोतरी, कोटक सिक्योरिटीज ने दी जानकारी

भारतीय रिजर्व बैंक की हॉकिश मॉनेटरी पॉलिसी का रुख कमोडिटी इन्फ्लेशन और ग्लोबल मार्केट वोलेटिलिटी को लेकर बढ़ती चिंताओं को दर्शाता है। कोटक सिक्योरिटीज में कमोडिटीज रिसर्च के हेड अनिंद्य बनर्जी ने एक इंटरव्यू में यह बात कही है।

न्यूट्रल रुख से कैलिब्रेटेड टाइटनिंग की ओर बदलाव यह संकेत देता है कि आगे और इंटरेस्ट रेट हाइक हो सकते हैं। बनर्जी के अनुसार, इन्फ्लेशन और इकोनॉमिक आउटलुक के आधार पर आरबीआई दिसंबर में 25-बेसिस-पॉइंट का धीरे-धीरे रेट हाइक या 50-बेसिस-पॉइंट की तेज बढ़ोतरी का विकल्प चुन सकता है।

  • आरबीआई का रुख न्यूट्रल से बदलकर कैलिब्रेटेड टाइटनिंग हो गया है।
  • दिसंबर में 25-बेसिस-पॉइंट या 50-बेसिस-पॉइंट की बढ़ोतरी संभव है।
  • कंज्यूमर प्राइस इन्फ्लेशन करीब 6 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
  • जुलाई और अगस्त के दौरान 7 बिलियन अमेरिकी डॉलर का इनफ्लो देखा गया था।
  • क्रूड ऑयल की कीमत दिसंबर तक 110-115 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है।

इन्फ्लेशन और कमोडिटी की स्थिति

कंज्यूमर प्राइस इन्फ्लेशन यानी CPI के करीब 6 प्रतिशत रहने का अनुमान है, और इन्फ्लेशन आउटलुक काफी हद तक एनर्जी और रॉ मटेरियल की लागत पर निर्भर करेगा। यह लागत एग्रीकल्चर और इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन को प्रभावित कर रही है। बनर्जी ने कहा कि यह ब्रॉड-बेस्ड कमोडिटी इन्फ्लेशन है जो हम देख रहे हैं।

क्रूड ऑयल और ग्लोबल अर्थव्यवस्था

लगातार ऊंचे तेल दाम मांग को नुकसान पहुंचा सकते हैं और ग्लोबल मंदी का खतरा बढ़ा सकते हैं। ग्लोबल सप्लाई चेन में व्यवधान, अधिक फ्रेट कॉस्ट और इंश्योरेंस प्रीमियम ने क्रूड की वास्तविक लागत को बढ़ा दिया है। ब्रूड क्रूड की कीमतें दिसंबर तक 110-115 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ सकती हैं, हालांकि भारत के पास नेट रिफाइनिंग सरप्लस देश होने का फायदा है।

रुपया और विदेशी फंड फ्लो

घरेलू ब्याज दरों को बढ़ाना बाहरी दबावों के खिलाफ भारतीय रुपए का समर्थन करने के लिए प्रभावी टूल नहीं हो सकता है। रुपया अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और मजबूत अमेरिकी डॉलर के दबाव का सामना कर रहा है। जुलाई और अगस्त के दौरान 7 बिलियन अमेरिकी डॉलर का इनफ्लो अक्टूबर की शुरुआत तक 8.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर के आउटफ्लो में बदल गया। यदि ग्लोबल दबाव बने रहते हैं, तो दिसंबर तक USD/INR 97.5-98 तक पहुंच सकता है।

सोने की मांग और बाजार

ऊंची अमेरिकी रियल यील्ड घरेलू सोने की कीमतों में तेजी को सीमित कर सकती है, जबकि रुपए में गिरावट कुछ समर्थन दे सकती है। त्योहारी सीजन से पहले ज्वेलरी की मांग में सुधार हो सकता है। सिक्कों, बार और एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स यानी ETF के जरिए सोने की इन्वेस्टमेंट डिमांड कम बनी रह सकती है।

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