RBI की इंडस्ट्रियल आउटलुक सर्वे रिपोर्ट: Q3FY27 में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में डिमांड सुधरने की उम्मीद

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी RBI ने अपनी इंडस्ट्रियल आउटलुक सर्वे की रिपोर्ट जारी कर दी है। इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में Q3FY27 के दौरान डिमांड मजबूत रहने की उम्मीद है। हालांकि इसके साथ ही लागत का दबाव भी बना रहेगा।
यह सर्वे रिजर्व बैंक द्वारा मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के बिजनेस कंडीशंस का आकलन करने के लिए किया गया है। यह सर्वे का 115वां राउंड है जिसे जुलाई से सितंबर 2026 के बीच कंडक्ट किया गया था। इस सर्वे में कुल 1,224 मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के जवाब शामिल किए गए हैं।
- Q3FY27 में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में मजबूत डिमांड की उम्मीद है।
- Q2FY27 में बिजनेस असेसमेंट इंडेक्स यानी BAI बढ़कर 104.4 हो गया जो Q1FY27 में 100.4 था।
- सर्वे में 1,224 मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों ने हिस्सा लिया।
- सर्वे जुलाई से सितंबर 2026 के बीच किया गया था।
- Q3FY27 के लिए बिजनेस एक्सपेक्टेशन इंडेक्स यानी BEI में सुधार दर्ज किया गया है।
Q2FY27 में कैसे रहे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के हालात
Q2FY27 के दौरान भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में पिछली तिमाही की तुलना में डिमांड की स्थिति में सुधार देखा गया है। यह सुधार बेहतर प्रोडक्शन, ऑर्डर बुक्स और कैपेसिटी यूटिलाइजेशन के कारण हुआ है। हालांकि इस दौरान रॉ मटेरियल की लागत का दबाव अधिक बना रहा।
रॉ मटेरियल की लागत का दबाव अधिक रहने के साथ ही सेलिंग प्राइस को लेकर सेंटिमेंट्स में नरमी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, बिजनेस असेसमेंट इंडेक्स Q1FY27 के 100.4 से बढ़कर Q2FY27 में 104.4 हो गया है। यह कुल बिजनेस कंडीशंस में सुधार को दर्शाता है।
Q3FY27 और आगे की तिमाहियों के लिए क्या है अनुमान
Q3FY27 को लेकर मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों में डिमांड को लेकर काफी उम्मीदें हैं। कंपनियों को प्रोडक्शन, ऑर्डर बुक्स, कैपेसिटी यूटिलाइजेशन और एक्सपोर्ट में सुधार की उम्मीद है। हालांकि लागत का दबाव अभी भी बना रहने की संभावना है।
लागत के दबाव के साथ ही सेलिंग प्राइस और प्रॉफिट मार्जिन को लेकर भी उम्मीदें बनी हुई हैं। Q3FY27 के लिए बिजनेस एक्सपेक्टेशन इंडेक्स यानी BEI में भी सुधार हुआ है जो मजबूत बिजनेस कॉन्फिडेंस को दिखाता है।
आने वाली तिमाहियों में कैसी रहेगी डिमांड
Q4FY27 और Q1FY28 के लिए मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को हेल्दी डिमांड कंडीशंस जारी रहने की उम्मीद है। कंपनियों का कुल बिजनेस कंडीशंस, प्रोडक्शन, ऑर्डर बुक्स और कैपेसिटी यूटिलाइजेशन पर पॉजिटिव आउटलुक है। इनपुट कॉस्ट का दबाव भी जारी रहने की संभावना है।
इनपुट कॉस्ट का दबाव बने रहने के कारण कंपनियां बढ़ी हुई लागत को बढ़े हुए सेलिंग प्राइस के जरिए आगे बढ़ा सकती हैं। यह सर्वे सेंट्रल बैंक द्वारा IOS के माध्यम से पब्लिश किया जाने वाला एक तिमाही कंपोजिट इंडिकेटर है।