RBI ने Indiabulls Limited को Core Investment Company के रूप में दी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट की मंजूरी

RBI ने Indiabulls Limited को Core Investment Company के रूप में दी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट की मंजूरी

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा Indiabulls Limited को Core Investment Company (CIC) के रूप में सर्टिफिकेट ऑफ रजिस्ट्रेशन प्रदान किया गया है। इस मंजूरी के साथ कंपनी अब सेंट्रल बैंक के नियामक ढांचे के दायरे में आ गई है जो ऐसे निवेश-होल्डिंग एंटिटीज पर लागू होता है। यह जानकारी कंपनी द्वारा 2 अक्टूबर को दिए गए एक रेगुलेटरी फाइलिंग में साझा की गई है।

Indiabulls का पुराना नाम Yaari Digital Integrated Services Limited था। कंपनी ने अपने रेगुलेटरी फाइलिंग में बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम के लागू प्रावधानों के अनुसार कंपनी को Core Investment Company के रूप में रजिस्ट्रेशन का सर्टिफिकेट प्राप्त हुआ है। इस प्रक्रिया से कंपनी निवेश-होल्डिंग व्यवसाय की नियामक श्रेणी में आ गई है।

  • RBI ने Indiabulls Limited को Core Investment Company का सर्टिफिकेट दिया
  • यह जानकारी कंपनी द्वारा 2 अक्टूबर को रेगुलेटरी फाइलिंग में दी गई
  • कंपनी का पुराना नाम Yaari Digital Integrated Services Limited था
  • रजिस्ट्रेशन RBI अधिनियम के लागू प्रावधानों के तहत दिया गया है
  • फाइलिंग के अनुसार सर्टिफिकेट की वैधता अवधि को 'लागू नहीं' (not applicable) बताया गया है

Core Investment Company और RBI के नियम

Core Investment Company एक प्रकार की नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी होती है जो पारंपरिक उधार देने या अन्य वित्तीय व्यवसायों को करने के बजाय मुख्य रूप से अपनी खुद की समूह की कंपनियों में निवेश रखती है और उन्हें फंडिंग प्रदान करती है। RBI के नियमों के तहत एक CIC आम तौर पर अपनी नेट एसेट्स का कम से कम 90 प्रतिशत हिस्सा समूह की कंपनियों में निवेश या लोन के रूप में रखती है। इसके अलावा नेट एसेट्स का कम से कम 60 प्रतिशत हिस्सा समूह की कंपनियों में इक्विटी निवेश के रूप में होता है।

यह रजिस्ट्रेशन मूल रूप से Indiabulls के निवेश-होल्डिंग व्यवसाय की प्रकृति के आधार पर एक नियामक वर्गीकरण है। इसे किसी नए कंज्यूमर-फेसिंग बैंकिंग या लोन ऑपरेशन को शुरू करने की मंजूरी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। फाइलिंग में यह भी स्पष्ट किया गया है कि कंपनी पर CIC फ्रेमवर्क लागू नहीं होने की स्थिति में इस सर्टिफिकेट को सरेंडर किया जा सकता है।

फाइलिंग में बताई गई अन्य शर्तें और वित्तीय प्रभाव

कंपनी ने फाइलिंग में उल्लेख किया कि यदि CIC फ्रेमवर्क कंपनी पर लागू नहीं पाया जाता है तो उक्त सर्टिफिकेट को सरेंडर कर दिया जाएगा और इस विषय पर कंपनी द्वारा मूल्यांकन किया जा रहा है। कंपनी ने RBI रजिस्ट्रेशन से किसी भी तत्काल वित्तीय प्रभाव का खुलासा नहीं किया है। अपने रेगुलेटरी डिस्क्लोजर में कंपनी ने बताया कि इसे Core Investment Company के रूप में रजिस्टर किया गया है और वैधता की अवधि को 'लागू नहीं' के रूप में चिह्नित किया गया है।

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