OMCs को पेट्रोल पर 8 रुपये और डीजल पर 9 रुपये का नुकसान, एलपीजी पर घाटा 300 रुपये प्रति सिलेंडर

नई दिल्ली में एक रिलीज में रेटिंग एजेंसी ICRA ने बुधवार को बताया कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ( OMCs ) को सितंबर में पेट्रोल पर 8 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 9 रुपये प्रति लीटर का नेगेटिव मार्केटिंग मार्जिन झेलना पड़ रहा है। इसके साथ ही घरेलू LPG पर नुकसान बढ़कर करीब 300 रुपये प्रति सिलेंडर तक पहुंच गया है।
रेटिंग एजेंसी के अनुसार, पिछले कुछ हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने और पेट्रोल, डीजल तथा LPG की घरेलू खुदरा कीमतों में कोई बदलाव न होने के कारण यह नेगेटिव मार्जिन और LPG अंडर-रिकवरी की स्थिति पैदा हुई है। इन स्तरों पर OMCs को होने वाला दैनिक नुकसान करीब 530 करोड़ रुपये अनुमानित है।
- पेट्रोल पर नेगेटिव मार्केटिंग मार्जिन: 8 रुपये प्रति लीटर
- डीजल पर नेगेटिव मार्केटिंग मार्जिन: 9 रुपये प्रति लीटर
- घरेलू LPG पर प्रति सिलेंडर नुकसान: करीब 300 रुपये
- OMCs का अनुमानित दैनिक नुकसान: करीब 530 करोड़ रुपये
- 21 सितंबर 2026 को इंडियन क्रूड बास्केट: USD 117.4 प्रति बैरल
- 30 जून 2026 तक संचयी नेगेटिव LPG बफर: 61,940 करोड़ रुपये
कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव
बढ़े हुए भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता के बीच पिछले कुछ हफ्तों में ब्रेंट क्रूड में उतार-चढ़ाव जारी रहा है। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में इन उतार-चढ़ावों ने फ्यूल बाजारों पर दबाव बनाए रखा है और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के लिए अनिश्चितता बढ़ा दी है।
ICRA के सीनियर वाइस-प्रेसिडेंट और को-ग्रुप हेड, कॉरपोरेट सेक्टर रेटिंग्स प्रशांत वशिष्ठ ने कहा कि पश्चिम एशियाई संघर्ष के बढ़ने और प्रमुख तेल आपूर्ति मार्गों में व्यवधानों के कारण हाल के हफ्तों में क्रूड की कीमतों में तेजी आई है। इसके परिणामस्वरूप ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को बड़े पैमाने पर मार्केटिंग नुकसान और LPG अंडर-रिकवरी का सामना करना पड़ा है।
भारतीय क्रूड बास्केट और OMCs की लाभप्रदता पर असर
बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया में आपूर्ति में व्यवधानों के बीच, 2025-26 में औसतन करीब USD 66 प्रति बैरल रहने वाला इंडियन क्रूड बास्केट 21 सितंबर 2026 को बढ़कर USD 117.4 प्रति बैरल हो गया। ICRA का कहना है कि ऊंचे क्रूड भाव और बिना बदले घरेलू ईंधन के दाम OMCs की लाभप्रदता और कैश फ्लो पर दबाव डालेंगे।
इससे उच्च कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उनके शॉर्ट-टर्म उधार बढ़ सकते हैं। प्रशांत वशिष्ठ ने कहा कि 2026-27 में OMCs की कमाई पर असर क्रूड कीमतों, प्रोडक्ट क्रैक, खुदरा मूल्य संशोधन और LPG अंडर-रिकवरी के लिए सरकार के समर्थन पर निर्भर करेगा।
LPG अंडर-रिकवरी और बफर की स्थिति
LPG पर दबाव भी बढ़ गया है और ICRA के अनुसार 30 जून 2026 तक संचयी नेगेटिव LPG बफर 61,940 करोड़ रुपये था। 2026-27 की पहली तिमाही में प्रति घरेलू सिलेंडर अनुमानित नुकसान करीब 500 रुपये था और सितंबर में यह करीब 300 रुपये पर बना रहा।
ICRA का कहना है कि यदि घरेलू बिक्री मूल्यों में कोई तदनुरूप वृद्धि या अतिरिक्त सरकारी मुआवजा दिए बिना अंतरराष्ट्रीय कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहती हैं, तो LPG अंडर-रिकवरी के और अधिक बढ़ने की संभावना है।