नोएल टाटा ने एन चंद्रशेखरन के पुनर्विस्तार को बताया अवैध, टाटा संस और टाटा ट्रस्ट में विवाद गहराया

नोएल टाटा ने एन चंद्रशेखरन के पुनर्विस्तार को बताया अवैध, टाटा संस और टाटा ट्रस्ट में विवाद गहराया

मुंबई में टाटा समूह के शीर्ष स्तर पर एक बड़ा विवाद सामने आया है। टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस बोर्ड के उस फैसले को खारिज कर दिया है जिसके तहत एन चंद्रशेखरन का कार्यकाल एक्जीक्यूटिव चेयरमैन के रूप में पांच साल के लिए और बढ़ाने का निर्णय लिया गया था। टाटा ट्रस्ट्स ने इस प्रस्ताव को अवैध और शून्य करार दिया है।

यह पूरा घटनाक्रम टाटा संस की एक अहम बोर्ड बैठक के दौरान सामने आया। इस बैठक में डायरेक्टर्स ने 4-1 के बहुमत से एन चंद्रशेखरन को उनके मौजूदा कार्यकाल के बाद दोबारा नियुक्त करने के पक्ष में वोट किया। वर्तमान कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होना है।

इस वोटिंग में एकमात्र असहमति का वोट टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल एन टाटा की ओर से आया। नोएल टाटा ने तर्क दिया कि यह कदम कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन का उल्लंघन करता है। टाटा ट्रस्ट्स ने अपने आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी।

  • टाटा संस बोर्ड की बैठक में एन चंद्रशेखरन के कार्यकाल को पांच साल बढ़ाने पर मतदान हुआ।
  • चार डायरेक्टर्स ने पुनर्नियुक्ति के पक्ष में वोट किया और नोएल टाटा ने इसके खिलाफ वोट किया।
  • नोएल टाटा ने इस प्रस्ताव को कंपनी के नियमों के खिलाफ और कानूनी रूप से शून्य बताया।
  • टाटा ट्रस्ट्स के अनुसार नियुक्ति के लिए ट्रस्ट के नॉमिनी डायरेक्टर्स का बहुमत जरूरी है।
  • नोएल टाटा ने इस मामले में पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की कानूनी राय भी सौंपी थी।

टाटा ट्रस्ट्स और नोएल टाटा का रुख

टाटा ट्रस्ट्स ने स्पष्ट किया कि एन चंद्रशेखरन को चेयरमैन के रूप में दोबारा नियुक्त करने का प्रस्ताव कानूनी रूप से शून्य है। ट्रस्ट के अनुसार टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के प्रावधानों के तहत चेयरमैन की नियुक्ति की प्रक्रिया में ट्रस्ट के नॉमिनी डायरेक्टर्स के बहुमत का पक्ष में होना अनिवार्य है। यह नियम पहली नियुक्ति और पुनर्नियुक्ति दोनों पर लागू होता है।

नोएल टाटा ट्रस्ट के नॉमिनी डायरेक्टर्स में शामिल हैं और उन्होंने इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया। इसके चलते यह प्रस्ताव कानूनी रूप से बिना किसी आधार और व्यर्थ हो गया। टाटा ट्रस्ट्स ने यह भी बताया कि नोएल टाटा ने इस संबंध में पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की एक कानूनी राय भी प्रस्तुत की थी, जिस पर बोर्ड ने कोई ध्यान नहीं दिया।

टाटा संस का फैसला और आरबीआई गाइडलाइंस

टाटा संस ने इससे पहले बताया था कि उसके बोर्ड ने बहुमत से यह प्रस्ताव पास किया है कि एन चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें पांच साल की अवधि के लिए दोबारा एक्जीक्यूटिव चेयरमैन नियुक्त किया जाए। टाटा संस ने यह भी कहा था कि वह लागू होने वाले आरबीआई गाइडलाइंस का पालन करने के लिए कदम उठाएगा और अनुपालन आवश्यकताओं पर आरबीआई, टाटा ट्रस्ट्स व अन्य स्टेकहोल्डर्स से मार्गदर्शन मांगेगा।

टाटा ट्रस्ट्स ने कहा कि चंद्रशेखरन का वह फैसला पहले ही स्वीकार किया जा चुका था जिसमें उन्होंने दोबारा नियुक्ति नहीं चाहने की बात कही थी। एन चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को टाटा संस बोर्ड को सूचित किया था कि वह 20 फरवरी 2027 को अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद दोबारा इस पद के लिए आवेदन नहीं करेंगे। टाटा संस के अपने बयान में भी उस फैसले का उल्लेख है।

उत्तराधिकारी की चयन प्रक्रिया पर जोर

टाटा ट्रस्ट्स ने बताया कि उसने अगले ही दिन चंद्रशेखरन के उस फैसले को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया था। साथ ही टाटा संस को सलाह दी गई थी कि कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के अनुसार उत्तराधिकारी की नियुक्ति के लिए एक सिलेक्शन कमेटी का गठन करने की प्रक्रिया शुरू की जाए।

ट्रस्ट्स का कहना है कि जब इस तरह का निर्णय सार्वजनिक रूप से संचारित हो जाता है, तो इसके परिणाम होते हैं जिन्हें बाद में पलटा नहीं जा सकता। समूह के कर्मचारियों, उधारदाताओं, काउंटरपार्टीज, बाजार और बहुसंख्यक शेयरधारक सभी ने इसी आधार पर कदम उठाए हैं। टाटा ट्रस्ट्स ने कहा कि उसकी स्थिति अब भी वही है और सिलेक्शन कमेटी को टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के तहत समय पर नेतृत्व परिवर्तन के लिए आगे बढ़ना चाहिए।

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