मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट के अनुसार भारतीय इंटरनेट कंपनियां मजबूत मांग और फंडिंग की चुनौती के बीच बेहतर रेवेन्यू दे सकती हैं

भारतीय इंटरनेट कंपनियां आने वाले तिमाही परिणामों में उम्मीद से मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज कर सकती हैं। मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट के अनुसार फंडिंग की तंग स्थितियों और कड़ी प्रतिस्पर्धा के बावजूद ओवरऑल मांग मजबूत बनी हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बढ़ते interest rates और अन्य मैक्रोइकोनॉमिक दबावों की चिंताओं के बीच भी भारतीय इंटरनेट मार्केट में स्थिरता बनी रही है।
रिपोर्ट के अनुसार सितंबर 2026 में इंटरनेट कंपनियों ने 299 मिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाए। यह आंकड़ा अगस्त से 37 प्रतिशत और एक साल पहले की तुलना में 52 प्रतिशत कम है। सितंबर महीने में कुल 35 funding deals दर्ज की गईं, जबकि अगस्त में 36 और सितंबर 2025 में 39 deals दर्ज थीं।
- मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट के अनुसार भारतीय इंटरनेट कंपनियां बेहतर रेवेन्यू ग्रोथ दिखा सकती हैं।
- सितंबर 2026 में इंटरनेट कंपनियों ने 299 मिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाए।
- सितंबर महीने में कुल 35 funding deals रिकॉर्ड की गईं।
- फंडिंग का माहौल तंग बना हुआ है और निवेश मुख्य रूप से अर्ली और मिड-स्टेज कंपनियों पर केंद्रित है।
- क्विक कॉमर्स में Blinkit और फूड डिलीवरी में Toing अपनी स्थिति मजबूत कर रहे हैं।
भारतीय इंटरनेट कंपनियों के प्रदर्शन और फंडिंग की स्थिति
मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले तिमाही परिणामों में टॉप-लाइन सरप्राइज की गुंजाइश है। कंपनियों का रेवेन्यू प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर हो सकता है। हालांकि एक ही सेगमेंट में काम करने वाली कंपनियों के प्रदर्शन में अंतर लगातार बढ़ रहा है। मजबूत एक्जीक्यूशन दिखाने वाले व्यवसायों को अधिक valuation premiums मिल रहे हैं। रिपोर्ट आने से पिछले महीने में भारत का internet index 5 प्रतिशत गिर गया था, जो कि पिछले तीन महीनों की बढ़त के बाद हुआ है।
फंडिंग के मोर्चे पर स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। सितंबर के महीने में कोई भी large deal दर्ज नहीं की गई। निवेश मुख्य रूप से अर्ली और मिड-स्टेज कंपनियों में केंद्रित रहा, जबकि लेट-स्टेज deals की संख्या कम रही। सितंबर में e-commerce और health and fitness ने सबसे अधिक रुचि आकर्षित की। साल-दर-साल आधार पर fintech, e-commerce और enterprise technology का निवेश में सबसे बड़ा हिस्सा रहा है।
प्रतिस्पर्धा और बाजार हिस्सेदारी में बदलाव
फूड डिलीवरी, क्विक कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स में शेयर-प्राइस के प्रदर्शन में भारी अंतर दिखाई दे रहा है। यह अंतर कंपनियों के earnings performance और market expectations को दर्शाता है। क्विक कॉमर्स में app downloads के मामले में Blinkit का नेतृत्व लगातार बना हुआ है। फूड डिलीवरी सेगमेंट में Toing तेजी से आगे बढ़ रहा है।
होम सर्विसेज सेगमेंट में Urban Company के साथ प्राइवेट कंपनियां अंतर को कम कर रही हैं। यह डेटा firm द्वारा ट्रैक किए गए monthly active और daily active user डेटा पर आधारित है। भारतीय इंटरनेट मार्केट resilient बना हुआ है, लेकिन निरंतर प्रदर्शन कंपनियों की प्रतिस्पर्धा और पूंजी तक सीमित पहुंच के बीच एक्जीक्यूशन की क्षमता पर निर्भर करेगा। आने वाली तिमाहियों में सेक्टर के प्रदर्शन को तय करने में earnings delivery और market-share gains के अंतर महत्वपूर्ण कारक बने रहने की संभावना है।