मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट के अनुसार मजबूत अर्निंग्स के चलते ग्लोबल इक्विटीज में लौट सकती है तेजी

मॉर्गन स्टेनली की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट में रिस्क एसेट्स का बुल मार्केट फिर से मोमेंटम हासिल कर सकता है। मजबूत इकोनॉमिक ग्रोथ, कॉर्पोरेट अर्निंग्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित प्रोडक्टिविटी बढ़ती बॉन्ड यील्ड्स के बावजूद रिटर्न को सपोर्ट कर रही है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि उच्च यील्ड्स खराब आर्थिक स्थितियों के बजाय मुख्य रूप से मजबूत नॉमिनल इकोनॉमिक ग्रोथ को दर्शाती हैं। इसी आधार पर फर्म ने फिक्स्ड इनकम की तुलना में ग्लोबल इक्विटीज पर ओवरवेट रुख अपनाया है।
मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- बॉन्ड यील्ड्स को बढ़ाने वाले कारक कम होने पर रिस्क एसेट्स का बुल मार्केट फिर से सक्रिय हो सकता है।
- मजबूत ग्रोथ से कॉर्पोरेट अर्निंग्स, कैश फ्लो, रोजगार, खपत और क्रेडिट क्वालिटी को समर्थन मिल रहा है।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अपनाना और निवेश प्रोडक्टिविटी और बिजनेस विस्तार के अहम ड्राइवर बने हुए हैं।
- उच्च ऊर्जा कीमतों और ब्याज दरों के बावजूद ग्लोबल इकोनॉमिक एक्टिविटी मजबूत बनी हुई है।
- अमेरिकी बाजारों पर ओवरवेट पोजीशन बरकरार रखी गई है, जबकि यूरोपीय इक्विटीज पर सतर्क रुख है।
आर्थिक वृद्धि और प्रोडक्टिविटी के कारण बेहतर स्थिति
मॉर्गन स्टेनली के अनुसार मजबूत ग्रोथ कॉर्पोरेट अर्निंग्स, कैश फ्लो, रोजगार, खपत और क्रेडिट क्वालिटी को लगातार सपोर्ट कर रही है। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल और निवेश प्रोडक्टिविटी और बिजनेस विस्तार के महत्वपूर्ण ड्राइवर बने हुए हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि ऊंची ऊर्जा कीमतों और ब्याज दरों के बावजूद ग्लोबल इकोनॉमिक एक्टिविटी मजबूत रही है। सर्विसेज और मैन्युफैक्चरिंग एक्टिविटी में तेजी के संकेत दिखाई दे रहे हैं।
उत्पादकता में सुधार से लेबर कॉस्ट में बिना किसी तदनुरूप वृद्धि के वेतन और आउटपुट बढ़ सकते हैं। इससे इन्फ्लेशन के दबाव को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
जोखिम और भू-राजनीतिक तनाव से जुड़े पहलू
हालांकि दृष्टिकोण अभी भी भू-राजनीतिक तनाव, एनर्जी सप्लाई में रुकावट और लगातार इन्फ्लेशन के प्रति संवेदनशील बना हुआ है। रिपोर्ट में तेल आपूर्ति में ऐसे झटके को मुख्य जोखिम बताया गया है जो सेंट्रल बैंकों को मॉनेटरी पॉलिसी को अत्यधिक सख्त करने के लिए मजबूर कर दे।
यदि इन्फ्लेशन अनियंत्रित हो जाती है, तो सेंट्रल बैंकों को अकोमोडेशन हटाने से लेकर एक्टिव रूप से डिमांड खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ाना होगा।
रिफाइंड ऑयल प्रोडक्ट्स, विशेषकर डीजल, सप्लाई में रुकावटों के प्रति संवेदनशील बने हुए हैं। इससे ऊर्जा की ऊंची लागत इन्फ्लेशन में ट्रांसमिट हो सकती है।
मार्केट के विभिन्न सेक्टरों का हाल
इक्विटीज के भीतर फर्म ने अमेरिकी बाजारों पर ओवरवेट पोजीशन बनाए रखी है जिसका कारण मजबूत ग्रोथ, मजबूत अर्निंग्स और लगातार AI का उपयोग है। एनर्जी से जुड़ी बाधाओं के कारण यूरोपीय इक्विटीज पर सावधानी बरती गई है।
बैंकों और यूटिलिटीज में अवसर पहचाने गए हैं। इसके अलावा भारतीय इक्विटीज के लिए चुनौतियों को रेखांकित किया गया है।
भारतीय बाजारों के लिए कमजोर फॉरवर्ड अर्निंग्स ग्रोथ उम्मीदों, सीमित AI एक्सपोजर और बढ़े हुए ऊर्जा मूल्यों का हवाला दिया गया है। जोखिमों का संतुलन फिलहाल कंस्ट्रक्टिव बना हुआ है, लेकिन आउटपुट इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या आर्थिक लचीलापन और प्रोडक्टिविटी में सुधार ऊर्जा की ऊंची कीमतों और इन्फ्लेशन के प्रभाव को ऑफसेट करना जारी रखते हैं।