लिस्टेड कंपनियों का CSR खर्च 17.5 प्रतिशत बढ़कर 22,563 करोड़ रुपये हुआ

मुंबई में क्र CRISIL ने अपनी एक रिपोर्ट जारी की है जिसके अनुसार वित्त वर्ष 2025 में लिस्टेड कंपनियों का कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी खर्च 17.5 प्रतिशत बढ़कर 22,563 करोड़ रुपये हो गया है। एक साल पहले यह खर्च 19,208 करोड़ रुपये था।
क्रिसिल की CSR ईयरबुक 2026 के आंकड़ों के मुताबिक इस खर्च की रिपोर्ट करने वाली कंपनियों की संख्या में 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है जो एक दशक में सबसे तेज वृद्धि है। यह जानकारी वित्तीय प्रदर्शन के आधार पर 2,323 लिस्टेड कंपनियों के विश्लेषण पर आधारित है।
- वित्त वर्ष 2025 में CSR खर्च करने वाली कंपनियों की संख्या बढ़कर 2,013 हो गई।
- वित्त वर्ष 2024 में यह संख्या 1,678 थी।
- 1,364 कंपनियों ने अपने औसत मुनाफे का कम से कम 2 प्रतिशत हिस्सा CSR पर खर्च किया।
- वित्त वर्ष 2024 में ऐसे अनुपालन करने वाली कंपनियों की संख्या 1,124 थी।
शिक्षा और स्वास्थ्य पर सबसे ज्यादा खर्च
शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट CSR खर्च का सबसे बड़ा क्षेत्र बना रहा जिस पर 9,182 करोड़ रुपये खर्च किए गए। यह कुल खर्च का लगभग 41 प्रतिशत है। इसके बाद हेल्थकेयर और सैनिटेशन पर 5,386 करोड़ रुपये यानी लगभग 24 प्रतिशत खर्च किए गए।
पर्यावरण, ग्रामीण विकास और स्पोर्ट्स ने सबसे तेज वृद्धि दर्ज की है। पर्यावरण पर खर्च लगभग चार गुना बढ़कर 2,371 करोड़ रुपये हो गया। ग्रामीण विकास पर खर्च बढ़कर 1,632 करोड़ रुपये हो गया और स्पोर्ट्स पर खर्च लगभग तीन गुना बढ़कर 753 करोड़ रुपये पहुंच गया।
इंडस्ट्री के हिसाब से योगदान और रिपोर्टिंग मानक
बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस सेक्टर 5,066 करोड़ रुपये के साथ सबसे बड़ा इंडस्ट्री योगदानकर्ता रहा। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने 4,530 करोड़ रुपये और एनर्जी सेक्टर ने 3,067 करोड़ रुपये का योगदान दिया। इन तीनों सेक्टरों ने कुल CSR खर्च का 56 प्रतिशत हिस्सा कवर किया।
क्रिसिल ने कहा कि कुछ थीम में तेज वृद्धि को बेहतर खुलासों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए क्योंकि वित्त वर्ष 2024 में लगभग 9,900 करोड़ रुपये का CSR खर्च गतिविधि-वार ब्रेक-अप के बिना रिपोर्ट किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार बेहतर रिपोर्टिंग मानकों से हितधारकों को अधिक पारदर्शिता मिलेगी।