इरडाई के बीमा कमीशन नियमों में बदलाव से बैंकों की कमाई पर आ सकता है मामूली संकट

इरडाई के बीमा कमीशन नियमों में बदलाव से बैंकों की कमाई पर आ सकता है मामूली संकट

बीमा नियामक की ओर से बीमा कमीशन पर प्रस्तावित सख्त कैप के कारण बैंकों की कमाई पर मामूली जोखिम आ सकता है। यह जोखिम मुख्य रूप से क्रेडिट-प्रोटेक्शन उत्पादों से मिलने वाली bancassurance फीस के जरिए आ सकता है, क्योंकि FY28 से डिस्ट्रीब्यूशन लागत और कमीशन ढांचे को दोबारा तय करने की तैयारी है। जेफरीज ने एक रिसर्च रिपोर्ट में यह जानकारी दी है।

जेफरीज के अनुसार, बीमा नियामक ने FY28 से बीमा कमीशन पर कैप को सख्त करने का प्रस्ताव रखा है। प्रस्तावित नियम भविष्य के लिए लागू होंगे और नियामक ने अगले एक महीने के दौरान ड्राफ्ट नियमों पर जनता की राय मांगी है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि इन बदलावों से बैंकों की bancassurance फीस पर थोड़ा नकारात्मक असर पड़ेगा, खासकर क्रेडिट-प्रोटेक्शन प्रीमियम पर, जो बड़े पैमाने पर सिंगल-प्रीमियम उत्पाद हैं और जिन पर अपेक्षाकृत अधिक कमीशन मिलता है।

  • बीमा नियामक FY28 से बीमा कमीशन पर कैप को सख्त करने का प्रस्ताव दे रहा है।
  • प्रस्तावित नियम भविष्य के प्रभाव से लागू होंगे और ड्राफ्ट पर एक महीने में राय मांगी गई है।
  • लाइफ इंश्योरर्स के लिए EoM सीमा दो साल में Gross Direct Premium Income का 15 प्रतिशत होगी।
  • लाइफ इंश्योरर्स के लिए पांच साल में EoM सीमा 12.5 प्रतिशत तक तय की जाएगी।
  • जनरल इंश्योरर्स के लिए यह सीमा पांच साल में Gross Written Premium से घटाकर 20 प्रतिशत की जाएगी।
  • IRDAI ने कंसल्टेशन पेपर पर स्टेकहोल्डर्स और जनता से 25 अक्टूबर, 2026 तक टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।

बीमा डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेमवर्क में बदलाव और नए नियम

यह टिप्पणियां Insurance Regulatory and Development Authority of India (IRDAI) द्वारा बीमा डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेमवर्क में बड़े बदलाव का प्रस्ताव देने के बाद आई हैं। इसमें कम खर्च सीमा, नए सिरे से तैयार किए गए कमीशन ढांचे और mis-selling के खिलाफ मजबूत सुरक्षा उपाय शामिल हैं। IRDAI ने मौजूदा डिस्ट्रीब्यूशन स्ट्रक्चर को तीन व्यापक श्रेणियों में बदलने का प्रस्ताव रखा है, जिसमें Insurance Distribution Entities, Insurance Distribution Persons और Market Infrastructure Institutions शामिल हैं। यह पूरा ढांचा “same structure, same functions, same norms” के सिद्धांत पर आधारित है।

बीमा कंपनियों के लिए Expense of Management की सीमाएं

एक अहम प्रस्ताव बीमा कंपनियों की Expense of Management यानी EoM की सीमाओं को कम करना है। लाइफ इंश्योरर्स के लिए EoM की छत दो साल के भीतर Gross Direct Premium Income यानी GDPI का 15 प्रतिशत और पांच साल के भीतर 12.5 प्रतिशत तय की जाएगी। जनरल इंश्योरर्स के लिए यह सीमा पांच साल में Gross Written Premium से घटकर घरेलू GDPI के 20 प्रतिशत पर आ जाएगी। नियामक ने बिजनेस सेगमेंट, डिस्ट्रीब्यूशन चैनल, उत्पाद की जटिलता और पॉलिसियों की बिक्री और सर्विसिंग में लगने वाले प्रयास जैसे कारकों के आधार पर कमीशन को नए सिरे से तय करने का प्रस्ताव भी दिया है।

बैंकों और एनबीएफसी पर प्रस्तावित नियमों का असर

बैंकों और NBFC के लिए प्रस्तावों में वॉल्यूम से जुड़े इंसेंटिव या बीमा बेचने वाले कर्मचारियों के लिए मिलने वाले रिवॉर्ड्स के खिलाफ सख्त सुरक्षा उपाय शामिल हैं। इसके साथ ही डायरेक्ट और इनडायरेक्ट पारिश्रमिक को कमीशन की रेगुलेटरी परिभाषा के दायरे में लाने के उपाय भी शामिल हैं। जेफरीज का आकलन बताता है कि कमीशन में बदलाव से bancassurance से बैंकों की फीस इनकम प्रभावित हो सकती है। क्रेडिट-प्रोटेक्शन उत्पादों में उनके हाई अपफ्रंट कमीशन ढांचे के कारण इसका असर ज्यादा साफ दिखाई दे सकता है। IRDAI ने कंसल्टेशन पेपर पर स्टेकहोल्डर्स और जनता से 25 अक्टूबर, 2026 तक टिप्पणियां आमंत्रित की हैं। कमीशन में प्रस्तावित बदलाव भविष्य के प्रभाव से लागू होंगे, जिससे मौजूदा बिजनेस पर तुरंत पड़ने वाला असर सीमित रहेगा।

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