भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 1,045.46 अंक लुढ़का और आरबीआई ने रेपो रेट बढ़ाकर 5.50% किया

गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार में भारी मंदी दर्ज की गई और बेंचमार्क इंडेक्स में बड़ी गिरावट आई। आरबीआई की मौद्रिक नीति सख्त होने और लगातार एफआईआई बिकوال के कारण बाजार में यह स्थिति बनी। बाजार के सभी व्यापक इंडेक्स लाल निशान पर बंद हुए।
बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 72,638.70 से 1,045.46 अंक यानी 1.44 प्रतिशत की गिरावट के साथ 71,593.24 पर बंद हुआ। इस दौरान इंडेक्स ने 71,327.75 का intraday low छुआ। निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 22,603.05 से 371.25 अंक यानी 1.64 प्रतिशत गिरकर 22,231.80 पर बंद हुआ और सत्र के दौरान 22,179.90 के नए 52-week low पर पहुंच गया।
इस बिकवाली के दबाव से बाजार पूंजीकरण में लगभग 10 से 11 लाख करोड़ रुपये साफ हो गए। यह गिरावट 7 अक्टूबर को मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी के रेपो रेट को 25 basis points बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत करने के फैसले के बाद शुरू हुई। आरबीआई गवर्नर संजय Malhotra ने पुष्टि की कि पॉलिसी रुख को 'calibrated tightening' में बदल दिया गया है।
- सेंसेक्स 71,593.24 पर बंद हुआ और 1,045.46 अंक की गिरावट दर्ज की
- निफ्टी 50 ने 22,231.80 पर कारोबार समाप्त किया और 371.25 अंक लुढ़का
- आरबीआई ने रेपो रेट 25 basis points बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत किया
- एफ आईआई ने 7 अक्टूबर को 6,121 करोड़ रुपये से अधिक के शेयर बेचे
- रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 96.75 पर पहुंचा
आरबीआई नीतिगत फैसले और आर्थिक अनुमान
केंद्रीय बैंक ने 2026-27 के लिए CPI inflation 5.2 प्रतिशत और GDP growth 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। आरबीआई गवर्नर संजय Malhotra ने बताया कि नीतिगत रुख में बदलाव से संकेत मिलता है कि केंद्रीय बैंक द्वारा आगे और rate hikes या pause संभव हैं। इस hawkish policy shift के बाद रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 96.75 पर पहुंच गया।
विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों का रुख
Foreign Institutional Investors ने अपनी निकासी जारी रखी और 7 अक्टूबर को 6,121 करोड़ रुपये से अधिक की इक्विटी बेची। यह लगातार नौवां सत्र था जिसमें net selling हुई और कुल आंकड़ा लगभग 57,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। Domestic Institutional Investors ने लगभग 4,596 करोड़ रुपये की net purchases के साथ आंशिक सहारा प्रदान किया।
बाजार इंडेक्स और वैश्विक कारक
नफ्टी Midcap 50 में 2.71 प्रतिशत की गिरावट आई और Nifty Midcap 100 तथा Smallcap 100 इंडेक्स दोनों में 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। India VIX वोलाटिलिटी इंडेक्स में 10 प्रतिशत से अधिक की तेजी आई। बाजार की भावना को तब और ठेस लगी जब Brent crude prices 104 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चले गए और US Treasury yields बढ़ गए, जिसमें 10-year yield लगभग 5.3 प्रतिशत और 30-year yield 5.71 प्रतिशत से अधिक हो गई।
क्षेत्रवार प्रदर्शन और प्रमुख शेयर
सेक्टर के आधार पर, Nifty Metal में सबसे बड़ी गिरावट आई और यह 3 प्रतिशत से अधिक गिरा। इसके बाद Realty, Oil & Gas, Energy, Auto, Pharma, FMCG, Consumer Durables और Financial Services में भी नुकसान दर्ज किया गया। Adani Enterprises, JSW Steel, ITC, Adani Ports, IndiGo, Power Grid और Reliance Industries प्रमुख laggards में शामिल थे। Infosys, Axis Bank, TCS, Tech Mahindra, HCL Technologies, Titan और Nestlé India ने resilience दिखाई।