भारतीय शेयर बाजार अब कॉर्पोरेट अर्निंग्स और मजबूत कैश फ्लो पर करेगा ज्यादा भरोसा: आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एएमसी रिपोर्ट

नई दिल्ली में 12 अक्टूबर को आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एएमसी द्वारा एक रिसर्च रिपोर्ट जारी की गई है। इसके अनुसार, भारतीय इक्विटी बाजार आने वाले समय में कॉर्पोरेट अर्निंग्स यानी कंपनियों की कमाई से ज्यादा संचालित होने की संभावना है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि मजबूत कैश फ्लो, टिकाऊ अर्निंग्स विजिबिलिटी और अनुशासित निष्पादन वाली कंपनियां बाजार की अस्थिरता से निपटने के लिए बेहतर स्थिति में होंगी। घरेलू तरलता और मजबूत आर्थिक गतिविधि बाजार को समर्थन दे सकती हैं।
- वेस्ट एशिया में तनाव, क्रूड ऑयल की कीमतें, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और एफपीआई आउटफ्लो बाजार को प्रभावित कर सकते हैं।
- सितंबर महीने में भू-राजनीतिक तनाव और अन्य कारणों से निफ्टी 50 में 6.1 प्रतिशत की गिरावट आई थी।
- विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी एफपीआई ने सेकेंडरी मार्केट से लगभग USD 4.1 बिलियन की निकासी की।
- घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगभग USD 8 billion की खरीदारी कर विदेशी बिकवाली के असर को कम किया।
- वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में नए प्रोजेक्ट अनाउंसमेंट्स साल-दर-साल लगभग 29 प्रतिशत बढ़कर Rs 14.6 trillion पर पहुंच गए।
सितंबर महीने में बाजार का प्रदर्शन और विदेशी निकासी
सितंबर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, ऊंचे क्रूड ऑयल भाव, ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में तेजी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बीच भारतीय इक्विटी पर भारी दबाव देखा गया। निफ्टी 50 इंडेक्स 6.1 प्रतिशत नीचे आया था।
इसी अवधि के दौरान निफ्टी मिडकैप 150 और निफ्टी स्मॉलकैप 250 इंडेक्स में लगभग क्रमशः 7.1 प्रतिशत और 3.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। सेकेंडरी मार्केट से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने लगभग USD 4.1 billion निकाले, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगभग USD 8 billion के शेयर खरीदे।
मैक्रोइकोनॉमिक मोर्चे पर महंगाई और बारिश की स्थिति
रिपोर्ट में महंगाई के दबाव और structurally higher interest-rate environment यानी ऊंचे ब्याज दरों वाले माहौल के जोखिम का जिक्र किया गया है। भारत की उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति जुलाई के 4.5 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में साल-दर-साल 4.8 प्रतिशत हो गई थी।
मानसून सीजन के दौरान देश में 12.6 प्रतिशत की बारिश की कमी दर्ज की गई थी। इससे कृषि उत्पादन, ग्रामीण आय और खाद्य मुद्रास्फीति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
कंपनियों की वित्तीय सेहत और वैल्यू-ओरिएंटेड बिजनेस
जो बिजनेस निकट अवधि में मजबूत कैश फ्लो पैदा कर रहे हैं, वे दूर के भविष्य की कमाई पर निर्भर कंपनियों की तुलना में बेहतर स्थिति में हो सकते हैं। उच्च डिस्काउंट दरों के कारण वैल्यूएशन पर असर पड़ सकता है।
अधिक कर्ज उठाने वाली कंपनियों के बैलेंस शीट पर फंडिंग लागत बढ़ने से जोखिम बढ़ सकता है। पोर्टफोलियो में मजबूत कैश जनरेशन, विवेकपूर्ण पूंजी संरचना और टिकाऊ बैलेंस शीट वाले वैल्यू-ओरिएंटेड बिजनेस को प्राथमिकता मिल सकती है।
निवेश दृष्टिकोण और आगामी प्रमुख कारक
निजी क्षेत्र के निवेश के दम पर वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में नए प्रोजेक्ट अनाउंसमेंट्स साल-दर-साल लगभग 29 प्रतिशत बढ़कर Rs 14.6 trillion हो गए, हालांकि सरकारी प्रोजेक्ट अनाउंसमेंट्स में गिरावट आई।
रिपोर्ट के अनुसार, वेस्ट एशिया में तनाव का दोबारा बढ़ना, मानसून से जुड़े महंगाई के आंकड़े और भारतीय रिजर्व बैंक के पॉलिसी निर्णय बाजार पर नजर रखने वाले मुख्य कारक बने रहेंगे। निवेशकों द्वारा फंडामेंटल पर ध्यान केंद्रित करने के कारण टिकाऊ अर्निंग्स विजिबिलिटी और मजबूत निष्पादन क्षमता वाली कंपनियां बाजार के प्रदर्शन के लिए महत्वपूर्ण होंगी।