सितंबर में भारत की रिटेल महंगाई दर बढ़कर पहुंची 5.5 प्रतिशत, FY27 में 5 से 5.2 प्रतिशत रहने का अनुमान

भारत की खुदरा महंगाई दर सितंबर महीने में बढ़कर 5.5 प्रतिशत हो गई है, जो अगस्त महीने में 4.8 प्रतिशत थी। यह आंकड़ा करीब दो साल का उच्चतम स्तर है। बैंक ऑफ बड़ौदा की एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, FY27 में भारत की रिटेल इन्फ्लेशन औसतन 5 से 5.2 प्रतिशत रहने की संभावना जताई गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बढ़ते खाद्य कीमतों, मौसम से जुड़ी बाधाओं और जारी वेस्ट एशिया संघर्ष के कारण महंगाई बढ़ने के जोखिम बने हुए हैं। इसके चलते रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी RBI द्वारा निकट भविष्य में दरों में और बढ़ोतरी की संभावना बन सकती है।
- सितंबर में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स आधारित महंगाई बढ़कर 5.5 प्रतिशत पर पहुंची।
- अगस्त महीने में रिटेल महंगाई दर 4.8 प्रतिशत दर्ज की गई थी।
- कंज्यूमर फूड प्राइस इन्फ्लेशन सितंबर में बढ़कर 7.7 प्रतिशत हो गई।
- प्याज की महंगाई सितंबर में बढ़कर 108 प्रतिशत पर पहुंच गई।
- कोर इन्फ्लेशन सितंबर महीने में बढ़कर 4.3 प्रतिशत दर्ज की गई।
प्रमुख बिंदुओं और खाद्य कीमतों का हाल
सितंबर महीने में कंज्यूमर फूड प्राइस इन्फ्लेशन बढ़कर 7.7 प्रतिशत हो गई, जो अगस्त की तुलना में करीब 170 बेसिस पॉइंट्स अधिक है। इस बढ़ोतरी में खाद्य कीमतों की मुख्य भूमिका रही है।
- प्याज की महंगाई अगस्त के 48.8 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 108 प्रतिशत हो गई।
- दालों की महंगाई 3.6 प्रतिशत से बढ़कर 4.7 प्रतिशत हो गई।
- खाद्य तेल, अनाज, चीनी, दूध, डेयरी उत्पाद, अंडे, फल और रेडीमेड फूड में भी महत्वपूर्ण मूल्य दबाव देखा गया।
वैश्विक खाद्य कीमतों और कोर इन्फ्लेशन का असर
रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर भी खाद्य कीमतों में दबाव के संकेत मिल रहे हैं। अनाज और खाद्य तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। ब्लैक सी क्षेत्र में लॉजिस्टिक बाधाओं के बीच गेहूं की कीमतें बढ़ी हैं। अमेरिका में उम्मीद से कम यील्ड और ब्राजील से निर्यात उपलब्धता घटने के कारण मक्का की कीमतें बढ़ी हैं।
खाद्य और ईंधन को छोड़कर निकाली जाने वाली कोर इन्फ्लेशन सितंबर में बढ़कर 4.3 प्रतिशत हो गई। ट्रांसपोर्ट इन्फ्लेशन अगस्त के 4.6 प्रतिशत से बढ़कर 5 प्रतिशत हो गई। कपड़े और जूतों की महंगाई 3.6 प्रतिशत से बढ़कर 3.9 प्रतिशत हो गई। रेस्तरां और आवास सेवाओं ने भी उच्च कोर इन्फ्लेशन में योगदान दिया।
महंगाई को बढ़ाने वाले जोखिम और कारक
बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट में आने वाले महीनों में खाद्य कीमतों के लिए कम मानसूनी बारिश, कम जलाशय स्तर और मजबूत होते एल नीनो की स्थितियों को जोखिम बताया गया है। जारी वेस्ट एशिया संघर्ष और ऊंचे क्रूड ऑयल की कीमतें भी महंगाई के दबाव को और बढ़ा सकती हैं।
हेडलाइन इन्फ्लेशन लगातार चौथे महीने RBI के 4 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कीमतों में दूसरी बार होने वाली बढ़ोतरी के असर पर भी करीब से नजर रखने की आवश्यकता है, क्योंकि लगातार बनी महंगाई मौद्रिक सख्ती के मामले को मजबूत कर सकती है।