वित्त मंत्रालय के अनुसार वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में भारत की ग्रोथ रेट 7.3 प्रतिशत रहने की उम्मीद है

वित्त मंत्रालय के अनुसार वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में भारत की ग्रोथ रेट 7.3 प्रतिशत रहने की उम्मीद है

वित्त मंत्रालय ने सितंबर 2026 के अपने मंथली इकोनॉमिक रिव्यू में कहा है कि मजबूत घरेलू मांग और निवेश के समर्थन से वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था के 7.3 प्रतिशत की दर से बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, अधिक ऑयल प्राइस, ग्लोबल फाइनेंशियल कंडीशंस में सख्ती और ट्रेड अनिश्चितता इस गति को बनाए रखने में चुनौती पेश कर सकती हैं।

रिव्यू में बताया गया कि पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज करने के बाद अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ दूसरी तिमाही में प्रवेश कर गई थी। यह मौजूदा सीरीज में सबसे अधिक पहली तिमाही की ग्रोथ थी। हालांकि, मंत्रालय ने चेतावनी दी कि भू-राजनीतिक ध्रुवीकरण और ग्लोबल सप्लाई चेन में व्यवधान बढ़ने के कारण भारत अपने ग्रोथ प्रदर्शन को हल्के में नहीं ले सकता है।

Economic Survey में सामने आए नाउकास्टिंग उपाय के अनुसार, वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में रियल GDP ग्रोथ रेट 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स बताते हैं कि ग्रोथ दूसरी तिमाही में भी जारी है, हालांकि गति थोड़ी धीमी है।

  • ई-वे बिल जनरेशन और मैन्युफैक्चरिंग एक्टिविटी में नरमी आई है।
  • अगस्त में नए बिजनेस और रोजगार के समर्थन से सर्विसेज एक्टिविटी मजबूत हुई है।
  • इलेक्ट्रिसिटी और फ्यूल की खपत में स्वस्थ ग्रोथ देखी गई है।
  • बैंक क्रेडिट का विस्तार लगातार जारी है।
  • कैपिटल और इंफ्रास्ट्रक्चर गुड्स का प्रोडक्शन मजबूत हुआ है।

ग्रामीण और शहरी बाजारों में खपत की मांग और निवेश

ग्रामीण और शहरी बाजारों में ऑटोमोबाइल की बिक्री व्यापक स्तर पर खपत की मांग का संकेत देती है। पहली तिमाही में निवेश दर मौजूदा सीरीज में अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई।

मैन्युफैक्चरिंग में 9.2 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की गई और सर्विसेज का विस्तार 10 प्रतिशत हुआ। यह आर्थिक विस्तार के दायरे को रेखांकित करता है।

निर्यात दृष्टिकोण और विदेशी मुद्रा भंडार

अप्रैल-अगस्त वित्त वर्ष 2027 के दौरान कुल मर्चेंडाइज और सर्विसेज एक्सपोर्ट 15.5 प्रतिशत बढ़कर 399.3 बिलियन USD पर पहुंच गया। इस मोमेंटम को भारत के ट्रेड एग्रीमेंट से जोड़ा गया है और कहा गया है कि और समझौते अतिरिक्त समर्थन दे सकते हैं।

अगस्त में मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट में 26.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि सर्विसेज ट्रेड सरप्लस ने मर्चेंडाइज ट्रेड घाटे के 65 प्रतिशत हिस्से की भरपाई की। 18 सितंबर तक 765.9 बिलियन USD का विदेशी मुद्रा भंडार बाहरी कमजोरियों के खिलाफ एक बड़ा बफर प्रदान करता है।

रिव्यू में यह भी संकेत दिया गया कि पिछले वित्त वर्ष की तुलना में इस वित्तीय वर्ष में नेट FDI इनफ्लो में सुधार हो सकता है। हालांकि, विकसित अर्थव्यवस्थाओं में बढ़ती ब्याज दरें निवेशकों को अपने घरेलू बाजारों में फंड बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित करके क्रॉस-बॉर्डर कैपिटल फ्लो को धीमा कर सकती हैं।

महंगाई का जोखिम और कृषि क्षेत्र

अगस्त में रिटेल इन्फ्लेशन बढ़कर 4.82 प्रतिशत हो गई। वहीं, ऊंचे एनर्जी प्राइस, मौसम संबंधी व्यवधान, त्योहारी मांग और इनपुट कॉस्ट नियर-टर दबाव को बढ़ा सकते हैं।

रेजरवॉयर स्टोरेज और स्थिर ग्राउंडवाटर कंडीशंस कृषि का समर्थन करते हैं। हालांकि, वर्षा के वितरण और आगामी रबी फसल के लिए संभावित अल नीनो से जुड़े जोखिमों पर निगरानी रखने की आवश्यकता है।

ग्रोथ बनाए रखने के लिए नीति निर्माण और शासन

ग्रोथ को बनाए रखने और निवेश आकर्षित करने के लिए रिव्यू में लगातार और समय पर नीति निर्माण, मजबूत शासन और अधिक प्रतिस्पर्धा पर जोर दिया गया है।

मंत्रालय का कहना है कि केवल एक प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था ही एक सफल, इनोवेटिव और मैन्युफैक्चरिंग अर्थव्यवस्था बनेगी। सरकार के सभी स्तरों पर बेहतर शासन और उन्नत राज्य क्षमता एक प्रतिस्पर्धी भारतीय अर्थव्यवस्था की कुंजी है।

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