भारत के कैपिटल मार्केट्स का रेवेन्यू पूल FY26 से FY30 के बीच 16 प्रतिशत की सालाना दर से बढ़ने की उम्मीद

मैक्वेरी रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत के कैपिटल मार्केट्स का रेवेन्यू पूल FY26 से FY30 के बीच 16 प्रतिशत की CAGR यानी सालाना चक्रवृधि दर से बढ़ने की उम्मीद है। यह वृद्धि बढ़ती घरेलू वित्तीयकरण, गहरी इक्विटी भागीदारी और व्यापक उत्पाद पेशकशों द्वारा संचालित होगी।
भारतीय हर साल वित्तीय परिसंपत्तियों में लगभग USD 500 बिलियन की बचत करते हैं। इस राशि का लगभग आधा हिस्सा कैश और डिपॉजिट में रखा जाता है, जो बाजार से जुड़े उत्पादों के लिए एक महत्वपूर्ण पूल बनाता है।
- भारतीय वित्तीय परिसंपत्तियों में सालाना USD 500 बिलियन बचाते हैं।
- बचत का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा कैश और डिपॉजिट में होता है।
- FY26 से FY30E के बीच संयुक्त निवेश और वेल्थ एवं एक्सचेंज रेवेन्यू पूल में 16 प्रतिशत CAGR की वृद्धि होगी।
- NSE पर सक्रिय आबादी लगभग 3 प्रतिशत और म्यूचुअल फंड रखने वाले लगभग 4 प्रतिशत हैं।
- FY13 में 21 मिलियन से डिमैट अकाउंट बेस बढ़कर FY26 में लगभग 225 मिलियन हो गया है।
- सालाना SIP इन्फ्लो FY19 में 1 लाख करोड़ रुपये से कम से बढ़कर FY26 में लगभग 3.5 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
बचत और वित्तीयकरण की संरचनात्मक स्थिति
बढ़ती जीडीपी प्रति व्यक्ति, बचत के औपचारिककरण और भौतिक तथा वित्तीय परिसंपत्तियों में बढ़ती भागीदारी द्वारा संचालित वित्तीयकरण एक लंबी अवधि का संरचनात्मक बदलाव है। यह घरेलू बचत के एड्रेसेबल पूल का लगातार विस्तार कर रहा है।
वित्तीयकरण, अधिक इक्विटी भागीदारी और व्यापक उत्पाद पेशकशों का संयोजन स्टॉक एक्सचेंजों और डिजिटल ब्रोकरों के लिए एक शक्तिशाली ऑपरेटिंग फ्लाईव्हील बना रहा है। भारत के कैपिटल मार्केट्स अभी भी कम पैठ वाले बने हुए हैं, जिसमें एनएसई पर केवल लगभग 3 प्रतिशत आबादी सक्रिय है और लगभग 4 प्रतिशत के पास म्यूचुअल फंड हैं।
डिमैट अकाउंट और SIP इन्फ्लो में तेजी
देश का डिमैट अकाउंट बेस तेजी से फैला है, जो FY13 में 21 मिलियन से बढ़कर FY26 में लगभग 225 मिलियन हो गया है। अकाउंट जुड़ने की गति भी FY20 के बाद से तेज हुई है, जो कैपिटल मार्केट्स में बढ़ती खुदरा भागीदारी को दर्शाती है।
खुदरा निवेश को सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लांस यानी SIP से और अधिक समर्थन मिला है। सालाना SIP इन्फ्लो FY19 में 1 लाख करोड़ रुपये से कम से बढ़कर FY26 में लगभग 3.5 लाख करोड़ रुपये हो गया है। शुरुआती FY26 से मासिक SIP इन्फ्लो 30,000 करोड़ रुपये से ऊपर बना हुआ है।
स्टॉक एक्सचेंजों की रेवेन्यू ग्रोथ और क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम
मैक्वेरी का अनुमान है कि स्टॉक एक्सचेंज FY30 तक लगभग 13 प्रतिशत वार्षिक रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज करेंगे। ट्रांजैक्शन रेवेन्यू लगभग 12 प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ने का अनुमान है, जबकि नॉन-ट्रांजैक्शन रेवेन्यू लगभग 15 प्रतिशत की दर से बढ़ने की उम्मीद है।
डेटा, कनेक्टिविटी, लिस्टिंग और इंडेक्स-लिंक्ड उत्पादों का बढ़ता योगदान एक्सचेंज के रेवेन्यू में विविधता ला सकता है। इससे ट्रेडिंग वॉल्यूम पर उनकी निर्भरता कम होगी और रेवेन्यू विजिबिलिटी में सुधार होगा।
रिपोर्ट में क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम से निकट अवधि के व्यवधान का भी संकेत दिया गया है। अनुमान लगाया गया है कि इक्विटी, डेरिवेटिव्स और मार्जिन-ट्रेडिंग वॉल्यूम पर इसका प्रभाव दो तिमाहियों तक बना रह सकता है क्योंकि बाजार की तरलता और ट्रेडिंग रणनीतियां समायोजित होंगी।
आगे देखते हुए, मैक्वेरी ने कहा कि कैपिटल मार्केट्स इकोसिस्टम एक ऐसे चरण में प्रवेश कर रहा है जहां कैश जनरेशन और कैपिटल डिप्लॉयमेंट तेजी से महत्वपूर्ण हो जाएंगे। कैपिटल एलोकेशन तेजी से परिणामों निर्धारित करेगा।