त्योहारी मांग के बावजूद सिंगल डिजिट में रह सकती है IIP ग्रोथ, यूनियन बैंक रिपोर्ट में खुलासा

नई दिल्ली में उनतीस सितंबर को जारी यूनियन बैंक ऑफ इंडिया रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन ग्रोथ आने वाले महीनों में सिंगल डिजिट में ही बना रह सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि त्योहारी मांग से सपोर्ट मिलेगा, लेकिन कमजोर मानसून, हाई इनपुट कॉस्ट और ग्लोबल सप्लाई अनिश्चितताओं के कारण डाउनसाइड रिस्क बने हुए हैं।
भारत का इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन यानी IIP अगस्त 2026 में ईयर-ऑन-ईयर आधार पर आठ प्रतिशत की दर से बढ़ा, जो जुलाई में 7.4 प्रतिशत था। रिपोर्ट में बताया गया है कि मजबूत ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ का एक हिस्सा फेवरेबल बेस के कारण था, जबकि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ अगस्त 26 के IIP नंबर के लिए मुख्य ड्राइविंग फैक्टर रही।
- यूनियन बैंक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार कमजोर मानसून और ग्लोबल रिस्क के चलते IIP ग्रोथ सिंगल डिजिट में रहने की संभावना है।
- अगस्त 2026 में भारत का IIP ग्रोथ ईयर-ऑन-ईयर आधार पर 8 प्रतिशत दर्ज किया गया, जो जुलाई में 7.4 प्रतिशत था।
- अगस्त में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ 9 प्रतिशत रही, जबकि जुलाई में यह 8.2 प्रतिशत थी।
- माइनिंग सेक्टर में 5.6 प्रतिशत का कॉन्ट्रैक्शन दर्ज किया गया, जो पिछले 17 महीनों में इस सेक्टर की सबसे तेज सुस्ती है।
- कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स अगस्त में 2.1 प्रतिशत की पॉजिटिव ग्रोथ पर लौट आए, जिससे रूरल डिमांड में सुधार का संकेत मिलता है।
मैन्युफैक्चरिंग और माइनिंग सेक्टर का प्रदर्शन
अगस्त में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ 9 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि जुलाई के महीने में यह 8.2 प्रतिशत थी। इसके विपरीत, माइनिंग सेक्टर में 5.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, यह पिछले 17 महीनों में इस सेक्टर का सबसे तेज स्लोडाउन रहा है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ को लो बेस इफेक्ट का सपोर्ट मिला, हालांकि इसमें नेगेटिव सीक्वेंशियल मोमेंटम भी देखा गया। ग्लोबल अनिश्चितताओं से आने वाले सप्लाई शॉक भारत के मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट पर डाउनवर्ड प्रेशर डालेंगे।
रूरल डिमांड और कंज्यूमर गुड्स की स्थिति
रिपोर्ट में डिमांड में धीरे-धीरे रिकवरी के संकेत मिलने की बात कही गई है, खासकर रूरल कंजम्पशन में। कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स अगस्त में 2.1 प्रतिशत की पॉजिटिव ग्रोथ पर लौट आए, जबकि पिछले महीने इनमें कॉन्ट्रैक्शन देखा गया था। यूनियन बैंक रिसर्च का कहना है कि यह रूरल डिमांड में तेजी का संकेत है।
अगस्त के महीने में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स की डिमांड पॉजिटिव बनी रही और कैपिटल गुड्स का प्रोडक्शन 16.9 प्रतिशत बढ़ा। वहीं, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 11.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इससे इन्वेस्टमेंट से जुड़े और डिस्क्रीशनरी डिमांड में लगातार मजबूती का पता चलता है।
इकनॉमिक एक्टिविटी और हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स
यूनियन बैंक रिसर्च के अनुसार हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स से पता चलता है कि अगस्त में कुल इकनॉमिक एक्टिविटी लचीली बनी रही। जीएसटी कलेक्शंस, ई-वे बिल, बिजली की मांग, डिजिटल पेमेंट और मजबूत रिटेल टू-व्हीलर बिक्री ने इसे सपोर्ट प्रदान किया।
रिपोर्ट के अंत में कहा गया है कि त्योहारी मांग के सपोर्ट और कमजोर मानसून, इनपुट कॉस्ट तथा ग्लोबल सप्लाई डिसरप्शन के रिस्क के बीच का संतुलन ही आने वाले महीनों में इंडस्ट्रियल ग्रोथ की रफ्तार तय करेगा।