IDFC बैंक घोटाला: ED की 14 जगहों पर रेड, 645 करोड़ हेराफेरी

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला के 14 ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक से जुड़े करीब 645 करोड़ रुपये के सरकारी फंड हेराफेरी के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुई। आरोप है कि हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ प्रशासन और अन्य खातों से पैसा निकालकर शेल कंपनियों और ज्वेलर्स के जरिए घुमाया गया।मंगलवार सुबह ट्राइसिटी के कई इलाकों में ED की टीमें पहुंच गईं। चंडीगढ़ जोनल ऑफिस-2 की यह कार्रवाई IDFC फर्स्ट बैंक घोटाले की मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा थी। छापेमारी में मलिक ज्वेलर्स, केएलजी ज्वेलर्स, एमबी गोल्ड ट्रेडर्स, श्याम ज्वेलर्स और सुंदर ज्वेलर्स जैसे कई बड़े ज्वेलरी ठिकाने शामिल थे। साथ ही गौरव कंसल के परिसर पर भी तलाशी ली गई, जिन पर आरोप है कि उन्होंने पैसे घुमाने में बिचौलिए की भूमिका निभाई।
पंचकूला /30 सितंबर 2026 /जनता आवाज़ न्यूज रिपोर्ट
IDFC बैंक घोटाला: चंडीगढ़-मोहाली-पंचकूला में ED की रेड, 14 ठिकानों पर छापे
IDFC First Bank और AU Small Finance Bank से जुड़े कथित फंड हेरफेर मामले में ED ने 29 सितंबर 2026 को चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला में 14 ठिकानों पर तलाशी ली। मामला करीब ₹645 करोड़ के सार्वजनिक धन की कथित हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। जांच में ज्वेलर्स, शेल कंपनियों और बैंक अधिकारियों के जरिए रकम को घुमाने के आरोप सामने आए हैं।
छापेमारी से फिर खुला ₹645 करोड़ के मामले का बड़ा अध्याय
चंडीगढ़ ट्राइसिटी में मंगलवार सुबह कई कारोबारी प्रतिष्ठानों पर जांच एजेंसियों की मौजूदगी ने एक बार फिर उस बैंक घोटाले को चर्चा में ला दिया, जिसकी रकम और नेटवर्क की परतें लगातार खुल रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला में कुल 14 परिसरों की तलाशी ली।
ED की यह कार्रवाई उस मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा है, जिसमें हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ प्रशासन और अन्य सरकारी खातों से कथित रूप से रकम निकालने और उसे अलग-अलग खातों के माध्यम से घुमाने की जांच चल रही है। एजेंसी के मुताबिक जांच में रकम को कारोबारी लेनदेन जैसा दिखाने की कोशिश सामने आई है।
किन ठिकानों पर पहुंची ED की टीम?
ताजा कार्रवाई में कई ज्वेलरी कारोबारियों और उनसे जुड़ी संस्थाओं के परिसरों को जांच के दायरे में लिया गया। इनमें मलिक ज्वेलर्स, KLG Jewels और उससे जुड़ी संस्थाएं, M.B. Gold Traders, Sham Jewellers तथा Sunder Jewellers शामिल बताए गए हैं।
इसके अलावा गौरव कंसल से जुड़े परिसर की भी तलाशी ली गई। जांच एजेंसी के अनुसार कंसल पर कथित तौर पर अपराध से अर्जित रकम को अलग-अलग खातों के जरिए आगे पहुंचाने और उसकी परतें बनाने में मध्यस्थ की भूमिका निभाने का आरोप है। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में होना है।
ED को क्या मिला?
ED के अनुसार तलाशी के दौरान ऐसे दस्तावेज और अन्य सामग्री मिली है, जो कथित धन के रूटिंग, लेयरिंग, छिपाने और उसे वैध कारोबारी रकम के रूप में दिखाने से संबंधित हो सकती है। बरामद सामग्री की जांच अभी जारी है।
जांच एजेंसी का आरोप है कि सरकारी खातों से निकली रकम को विभिन्न ज्वेलर्स के बैंक खातों में कारोबारी लेनदेन के रूप में भेजा गया। इसके बाद बैंकिंग चैनल के जरिए रकम के बदले नकद प्राप्त किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।
शेल कंपनियों से ज्वेलर्स तक कैसे पहुंची रकम?
ED की पहले की जांच में Capco Fintech Services, Swastik Desh Projects और अन्य कथित मध्यस्थ संस्थाओं का नाम सामने आया था। एजेंसी के अनुसार कुछ शेल संस्थाओं के बैंक खातों में सरकारी धन पहुंचा और फिर वह रकम आगे अलग-अलग खातों में ट्रांसफर की गई।
ED की जून 2026 की आधिकारिक कार्रवाई के मुताबिक जांच में यह भी सामने आया कि इन मध्यस्थ संस्थाओं से बड़ी रकम ज्वेलर्स तक पहुंची और कथित तौर पर बैंकिंग लेनदेन के बदले नकद उपलब्ध कराया गया। एजेंसी ने इसे अपराध से अर्जित रकम को छिपाने और उसकी वास्तविक प्रकृति बदलने की प्रक्रिया का हिस्सा बताया है।
मामला शुरू कैसे हुआ?
पूरे मामले की शुरुआत फरवरी 2026 में दर्ज FIR से हुई। शुरुआती जांच हरियाणा के Development and Panchayat Department के उन बैंक खातों में बैलेंस की गड़बड़ी से जुड़ी थी, जो IDFC First Bank और AU Small Finance Bank में संचालित थे।
ED ने PMLA के तहत अपनी जांच इसी आधार पर शुरू की। बाद में जांच का दायरा बढ़ा और दूसरे सरकारी विभागों तथा संगठनों से जुड़े खातों में भी कथित अनियमितताओं की पड़ताल शुरू हुई।
₹645 करोड़ का आंकड़ा कहां से आया?
यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य समझना जरूरी है। IDFC First Bank ने फरवरी 2026 में पहले करीब ₹590 करोड़ के संदिग्ध फ्रॉड की जानकारी दी थी। बाद में अतिरिक्त दावों और खातों के मिलान के बाद बैंक ने मार्च में कुल ₹645 करोड़ के नेट प्रिंसिपल भुगतान की जानकारी दी।
बैंक के मुताबिक यह उसी घटना से जुड़े दावों का संशोधित आंकड़ा था, कोई अलग नई घटना नहीं। वहीं ED की जून की आधिकारिक कार्रवाई में भी सार्वजनिक धन के कथित गबन की राशि ₹645 करोड़ बताई गई।
CBI की जांच में क्या सामने आया?
मामले में CBI भी जांच कर रही है। 2 सितंबर 2026 को CBI ने पंचकूला की विशेष अदालत में तीसरी चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें 19 आरोपियों को नामजद किया गया, जिनमें हरियाणा कैडर के छह IAS अधिकारी, IDFC First Bank के तीन अधिकारी, AU Small Finance Bank का एक अधिकारी और हरियाणा सरकार के नौ अन्य अधिकारी शामिल हैं।
CBI के अनुसार आठ हरियाणा सरकारी विभागों और संगठनों से संबंधित धन को कथित तौर पर IDFC First Bank और AU Small Finance Bank की चुनिंदा शाखाओं में पहुंचाया गया। इसके बाद रकम को कथित रूप से ऐसे तीसरे पक्ष के खातों में भेजा गया, जिनका संबंधित सरकारी विभागों से कोई संबंध नहीं था।
आठ सरकारी विभाग भी जांच के दायरे में
CBI की चार्जशीट के अनुसार जांच में पंचायत विभाग, पंचकूला और कालका नगर निगम, हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद, हरियाणा श्रम कल्याण बोर्ड, हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और हरियाणा पावर जेनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड से जुड़े फंड की जांच की गई।
CBI ने अपने अलग मामले में कथित हेराफेरी की राशि ₹504 करोड़ बताई है। दूसरी ओर ED की व्यापक मनी लॉन्ड्रिंग जांच में ₹645 करोड़ का आंकड़ा सामने आया है। इसलिए दोनों एजेंसियों के आंकड़ों को एक ही कानूनी दावे के रूप में मिलाकर देखना उचित नहीं होगा।
ED पहले भी कर चुकी है बड़ी कार्रवाई
यह इस मामले में ED की पहली बड़ी कार्रवाई नहीं है। 12 मार्च 2026 को ED ने चंडीगढ़, मोहाली, पंचकूला, गुरुग्राम और बेंगलुरु में 19 परिसरों पर तलाशी ली थी। उस समय एजेंसी ने करीब ₹597 करोड़ के कथित सार्वजनिक धन गबन की जांच का उल्लेख किया था।
बाद की जांच और दावों के मिलान के साथ मामले में राशि ₹645 करोड़ तक पहुंची। ED ने बाद में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया और संपत्तियों पर भी कार्रवाई की।
₹211 करोड़ की संपत्तियों पर भी कार्रवाई
ED के अनुसार अब तक इस मामले में लगभग ₹211 करोड़ मूल्य की चल और अचल संपत्तियां अटैच, जब्त या फ्रीज की जा चुकी हैं। एजेंसी ने 14 आरोपियों के खिलाफ विशेष PMLA अदालत, पंचकूला में अभियोजन शिकायत भी दाखिल की है।
ED ने जून 2026 में रियल एस्टेट कारोबारी विक्रम वाधवा की गिरफ्तारी की जानकारी देते हुए कहा था कि जांच में कथित अपराध से अर्जित रकम का बड़ा हिस्सा अलग-अलग संस्थाओं और संपत्तियों में लगाया गया। इन दावों की न्यायिक प्रक्रिया अभी जारी है।
आगे क्या होगा?
29 सितंबर की ताजा छापेमारी के बाद अब जांच का फोकस बरामद दस्तावेजों, बैंक खातों, कारोबारी लेनदेन और कथित धन के अंतिम लाभार्थियों पर रहेगा। ED यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि रकम किन रास्तों से आगे बढ़ी और किन लोगों या संस्थाओं तक पहुंची।
दूसरी ओर CBI की चार्जशीट के बाद आरोपियों के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। जांच एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि मामले में अन्य संदिग्धों और आरोपियों के खिलाफ जांच जारी है। इसलिए फिलहाल सामने आए नाम और आरोप अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं हैं।
IDFC First Bank से शुरू हुआ यह मामला अब केवल बैंकिंग अनियमितता तक सीमित नहीं रह गया है। ED की मनी लॉन्ड्रिंग जांच, CBI की चार्जशीट और ट्राइसिटी में हुई ताजा 14 स्थानों की तलाशी ने इसके वित्तीय नेटवर्क को जांच के केंद्र में ला दिया है।
सबसे महत्वपूर्ण सवाल अब यही है कि सरकारी धन कथित तौर पर किन चरणों से होकर गुजरा, किन खातों में गया और इसके वास्तविक लाभार्थी कौन थे। जांच आगे बढ़ने के साथ इन सवालों के जवाब सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी आरोपों और जांच एजेंसियों के दावों पर आधारित है; किसी आरोपी की दोषसिद्धि अदालत के अंतिम निर्णय से ही तय होगी।
स्रोत आधार: प्रवर्तन निदेशालय के आधिकारिक प्रेस रिलीज, CBI से संबंधित उपलब्ध रिपोर्टिंग तथा 29–30 सितंबर 2026 की ताजा रिपोर्टें।