आईडीबीआई बैंक के मौजूदा कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की सेवा शर्तें रहेंगी सुरक्षित, दीपम सचिव ने दी जानकारी

आईडीबीआई बैंक के मौजूदा कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की सेवा शर्तें डिसइनवेस्टमेंट के बाद पूरी तरह सुरक्षित रहेंगी। दीपम सचिव अरुणिश चावला ने शुक्रवार को एक इंटरव्यू में यह जानकारी दी।
यूनियन कैबिनेट ने बुधवार को आईडीबीआई बैंक में 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के लिए 52,878 करोड़ यानी 5.56 बिलियन डॉलर की डील को मंजूरी दी है। इस सौदे के तहत कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की सब्सिडियरी कंपनी बैंक का अधिग्रहण करेगी।
- आईडीबीआई बैंक के मौजूदा कर्मचारियों की सेवा शर्तों में कोई बदलाव नहीं होगा।
- मौजूदा पेंशनभोगियों के लिए एक अलग पेंशन फंड स्थापित किया गया है, जो पूरी तरह मेंटेन रहेगा।
- सरकार बैंक में अपनी 30.48 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगी।
- भारतीय जीवन बीमा निगम यानी एलआईसी अपनी 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगी।
- डिसइनवेस्टमेंट के बाद सरकार के पास 15 प्रतिशत और एलआईसी के पास 19 प्रतिशत हिस्सेदारी बचेगी।
शेयर परचेस एग्रीमेंट और कर्मचारियों की सुरक्षा
शेयर परचेस एग्रीमेंट में मौजूदा कर्मचारियों की सेवा शर्तों और पेंशन लाभ से जुड़े उपबंध शामिल किए गए हैं। क्वालिफाइड पार्टियों ने यह सहमति दी है कि मौजूदा कर्मचारियों की सेवा शर्तों में कोई बदलाव नहीं होगा।
मौजूदा कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को किसी भी तरह की आशंका नहीं रखनी चाहिए। मौजूदा पेंशनभोगियों के लिए एक अलग पेंशन फंड बनाया गया है, जिसे पूरी तरह से मेंटेन रखा जाएगा।
फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की भूमिका और आरबीआई के निर्देश
फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स पहले से कैथोलिक सीरियन बैंक का संचालन करती है। इसके अलावा, इसकी अन्य वित्तीय सेवाओं में वेल्थ मैनेजमेंट कंपनी आईआईएफएल और इंश्योरेंस कंपनी गो डिजिट शामिल हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई ने फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को निर्देश दिया है कि वह या तो कैथोलिक सीरियन बैंक का आईडीबीआई बैंक में विलय करे या दो साल के भीतर इससे बाहर हो जाए। एक एंटिटी स्थायी तौर पर केवल एक बैंकिंग लाइसेंस का संचालन कर सकती है।
बैंक और खरीदार दोनों की सब्सिडियरी कंपनियों को भी पुनर्गठन के तहत अगले दो साल के भीतर आईडीबीआई बैंक के दायरे में लाया जाएगा। इससे ग्राहकों को बैंक के माध्यम से इंटीग्रेटेड सेवाएं मिल सकेंगी।
बैंक का वैल्यूएशन और बेंचमार्क कीमत
सरकार ने डील के लिए कई पेशेवर सलाहकार नियुक्त किए थे, जिसमें ट्रांजैक्शन, लीगल और वैल्यूएशन एडवाइजर शामिल थे। दो स्वतंत्र वैल्यूएशन एडवाइजर ने बैंक की वैल्यू तय करने के लिए ग्लोबली स्वीकृत अलग-अलग पद्धतियों का उपयोग किया।
आईडीबीआई बैंक के केवल 5.3 प्रतिशत शेयर स्टॉक मार्केट में ट्रेड होते थे। पिछले छह से आठ महीनों के दौरान इसका शेयर प्राइस 61 रुपए से 118 रुपए के बीच उतार-चढ़ाव वाला रहा था।
- एक एडवाइजर ने मार्केट मल्टीपल्स मेथड का उपयोग करके बैंक के फंडामेंटल्स की तुलना अन्य समान उद्यमों से की।
- दूसरे एडवाइजर ने एसेट वैल्यूएशन मेथड का उपयोग किया, जिसमें 31 मार्च 2026 तक की ऑडिटेड बैलेंस शीट, प्रॉपर्टी और बैंकिंग लाइसेंस व ब्रांड वैल्यू सहित अन्य अमूर्त संपत्तियों की जांच की गई।
- बेंचमार्क कीमत तय करने के लिए फेयर मार्केट वैल्यू और फेयर एसेट वैल्यू के औसत का उपयोग किया गया।
जीतने वाली बोली बेंचमार्क कीमत और स्वतंत्र रूप से तय दोनों फेयर वैल्यू से अधिक थी।
आगे की प्रक्रिया और डील का महत्व
सफलतापूर्वक बोली लगाने वाले को फिट-एंड-प्रॉपर असेसमेंट के दौरान लगाई गई शर्तों को पूरा करने के लिए आरबीआई को कंप्लायंस डिटेल जमा करनी होगी। आरबीआई की मंजूरी मिलने के बाद शेयर परचेस एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। निर्धारित भुगतान को तय तीन साल की अवधि के भीतर पूरा करना होगा।
यह सौदा भारत के बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है। यह डील 5.6 बिलियन डॉलर की है, जिससे देश में बड़ा विदेशी निवेश आएगा।
सरकार गैर-रणनीतिक प्रकृति के उद्यमों का रणनीतिक पुनर्गठन जारी रखेगी।