2017 के डोकलाम विवाद के दौरान ICBC ने रोके थे 18.5 करोड़ डॉलर के भारतीय लोन, लीक दस्तावेजों में हुआ खुलासा

चीन के सबसे बड़े बैंक Industrial and Commercial Bank of China ने 2017 के सीमा विवाद के दौरान भारत में 11 स्वीकृत लोन सौदों को स्थगित कर दिया था। ये लोन कुल 18.5 करोड़ डॉलर के थे, जिन्हें दोनों देशों के बीच डोकलाम में चले 73 दिन के गतिरोध के दौरान रोका गया। The Indian Express और International Consortium of Investigative Journalists द्वारा समीक्षा किए गए आंतरिक रिकॉर्ड से यह जानकारी सामने आई है। इन दस्तावेजों से पता चलता है कि राजनीतिक संकट ने बैंक के कमर्शियल ऋण संचालन को सीधे तौर पर प्रभावित किया था।
बैंक के 2005 से 2024 तक के गोपनीय कार्य सारांश बताते हैं कि मुंबई ब्रांच ने कैसे जोखिमों का प्रबंधन किया। दस्तावेजों के अनुसार, बैंक ने लोन और निवेश के जोखिमों के प्रति अपने एक्सपोजर को सक्रिय रूप से कम किया। इस फैसले के कारण मुंबई ब्रांच के ऑपरेटिंग रेवेन्यू को 63.6 लाख डॉलर का झटका लगा। बीजिंग स्थित मुख्यालय ने वर्ष के लिए विशिष्ट लक्ष्य तय किए थे, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार मुंबई ऑफिस इस लक्ष्य का केवल 57.7 प्रतिशत हिस्सा ही हासिल कर पाया।
- ICBC ने 2017 के डोकलाम विवाद के दौरान 18.5 करोड़ डॉलर के 11 लोन सौदे रोके।
- मुंबई ब्रांच के ऑपरेटिंग रेवेन्यू को 63.6 लाख डॉलर का नुकसान हुआ।
- बैंक के मुंबई ऑफिस ने बीजिंग मुख्यालय के लक्ष्य का 57.7 प्रतिशत हिस्सा हासिल किया।
- Welter Trading Limited के 50 करोड़ डॉलर के सिंडिकेटेड फैसिलिटी में ICBC का एक्सपोजर 65 लाख डॉलर था।
- लीक डेटासेट को हैकिंग ग्रुप Hunters International ने प्राप्त किया था।
सीमा संकट पर बैंक की आंतरिक प्रतिक्रिया और पार्टी सेल की भूमिका
तनावपूर्ण अवधि के दौरान मुंबई ब्रांच के स्टाफ को जुटाने का निर्देश दिया गया था। आंतरिक रिपोर्ट के अनुसार, बैंक ने सभी विभागों में कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्यों को अपने पदों पर बने रहने के लिए संगठित किया। इन कर्मचारियों ने दूतावास और वाणिज्य दूतावास के साथ संचार बनाए रखा और आकस्मिक योजनाएं तैयार कीं। बैंक प्रबंधन ने स्टाफ की चिंताओं को दूर करने के लिए सीईओ टी सत्र और आमने-सामने की बातचीत भी आयोजित की।
China Capital फाइलों की जांच से संकेत मिलता है कि बैंक अक्सर अपने वाणिज्यिक निर्णयों को व्यापक राज्य के उद्देश्यों के साथ संरेखित करता है। 18.5 करोड़ डॉलर के सौदों को凍結 किए जाने के बावजूद, बैंक ने इन लेनदेन पर कोई क्रेडिट लॉस दर्ज नहीं किया। लीक हुआ डेटासेट मूल रूप से हैकिंग ग्रुप Hunters International द्वारा प्राप्त किया गया था, जिसे बाद में वैश्विक जांच टीम के साथ साझा किया गया।
वेदांता ग्रुप से जुड़े लोन और एक्सपोजर का प्रबंधन
रिकॉर्ड से पता चलता है कि 2014 में Welter Trading Limited को दिए गए 50 करोड़ डॉलर के सिंडिकेटेड फैसिलिटी से जुड़ा एक अलग मामला भी सामने आया है। यह कंपनी Vedanta Resources Plc की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है, और मूल फर्म इसमें गारंटर के रूप में काम कर रही है। ICBC के पास इस व्यवस्था में कुल 65 लाख डॉलर का एक्सपोजर था, जो इसकी लंदन, सिंगापुर और मुंबई शाखाओं के बीच विभाजित था।
2016 के आंतरिक मेमो में कमोडिटी में आई मंदी और विभिन्न रेटिंग डाउनग्रेड के कारण इस लोन को वॉचलिस्ट पर रखा गया था। दस्तावेजों में ग्रुप के कैश तक सीमित पहुंच और ड्यू डिलिजेंस जानकारी में कमियों को चिह्नित किया गया था। इन चिंताओं के बावजूद, यह लोन 2017 के दौरान पूरी तरह से चुका दिया गया था। The Indian Express, Firstpost, Jansatta और Navbharat Times के पत्रकारों द्वारा समीक्षा की गई फाइलों में कोई क्रेडिट लॉस दर्ज नहीं किया गया था।
नियामक निरीक्षण और आगे के खुलासे
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि हालांकि विदेशी शाखाएं अक्सर भू-राजनीतिक झटकों के दौरान जोखिम को कड़ा करती हैं, लेकिन पार्टी सेल का जुटाया जाना एक असामान्य खुलासा बना हुआ है। भारतीय नियामकों ने चीनी वित्तीय संस्थाओं पर कड़ा नियंत्रण बनाए रखा है, खासकर 2020 की गलवान संकट के बाद। ये लीक हुए दस्तावेज नीति निर्माताओं को कंसंट्रेशन रिस्क का आकलन करने के लिए एक मात्रात्मक डेटा पॉइंट प्रदान करते हैं।
निष्कर्षों के प्रकाशन के बाद आधिकारिक भारतीय सरकारी एजेंसियों ने कोई बयान जारी नहीं किया है। संसदीय समितियां या भारतीय रिजर्व बैंक इन रिकॉर्ड्स पर औपचारिक ब्रीफिंग मांग सकते हैं। मीडिया पार्टनर के अनुरोधों पर ICBC ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। 48 लाख फाइलों के कैश से भविष्य के खुलासे होने की उम्मीद है क्योंकि अधिक ICIJ पार्टनर अपने निष्कर्ष प्रकाशित करेंगे।