हार्ट अटैक: युवाओं में बढ़ता खतरा कितना सच?

हार्ट अटैक: युवाओं में बढ़ता खतरा कितना सच?

हार्ट अटैक: युवाओं में बढ़ता खतरा कितना सच? जानिए 5 संकेत

फिट दिखने वाला व्यक्ति भी हृदय रोग से पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता। उम्र, धूम्रपान, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल, मोटापा, तनाव, कम शारीरिक गतिविधि, खराब खान-पान और वायु प्रदूषण जैसे कई कारण जोखिम बढ़ा सकते हैं। कोविड-19 के बाद हृदय संबंधी जोखिम पर भी शोध हुआ है, लेकिन हर अचानक मौत को कोविड या हार्ट अटैक से जोड़ना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है।

कभी-कभी खतरा शरीर के बाहर दिखाई नहीं देता। व्यक्ति सामान्य दिख रहा होता है, रोज काम कर रहा होता है और उसे कोई बड़ी बीमारी भी महसूस नहीं होती, लेकिन अंदर ही अंदर ब्लड प्रेशर, शुगर, कोलेस्ट्रॉल, धमनियों या हृदय की विद्युत गतिविधि में समस्या विकसित हो सकती है। यही कारण है कि “मैं तो बिल्कुल फिट हूं” कहना हमेशा पर्याप्त सुरक्षा नहीं देता।

स्वास्थ्य विशेष रिपोर्ट/नई दिल्ली/राष्ट्रिय डेस्क | जनता आवाज़ न्यूज रिसोर्स /01/10/2026

अचानक हार्ट अटैक और मौत—क्या सचमुच उम्र की सीमा खत्म हो गई?

हार्ट अटैक किसी एक उम्र की बीमारी नहीं है। उम्र बढ़ने के साथ जोखिम बढ़ता है, लेकिन कम उम्र में भी हार्ट अटैक हो सकता है। भारत में युवा मरीजों पर हुए कई अध्ययनों में 40 वर्ष से कम उम्र के लोगों में भी हार्ट अटैक के मामले सामने आए हैं। हालांकि, इन अस्पताल-आधारित अध्ययनों को पूरे देश की युवा आबादी में बढ़ती दर का सीधा प्रमाण नहीं माना जा सकता।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हृदय और रक्तवाहिका संबंधी रोग दुनिया में मृत्यु का सबसे बड़ा कारण हैं। WHO के 2025 के आंकड़ों के मुताबिक 2022 में अनुमानित 19.8 करोड़ नहीं, बल्कि 19.8 मिलियन यानी 1.98 करोड़ लोगों की मौत हृदय-रक्तवाहिका रोगों से हुई और इनमें लगभग 85 प्रतिशत मौतें हार्ट अटैक और स्ट्रोक से जुड़ी थीं।

भारत के संदर्भ में ICMR के 2026 के एक न्यूजलेटर में हृदय-रक्तवाहिका रोगों को देश में मृत्यु का बड़ा कारण बताते हुए कहा गया है कि CVD भारत में होने वाली मौतों में 28.1 प्रतिशत का योगदान देता है। उसी दस्तावेज में STEMI यानी गंभीर प्रकार के हार्ट अटैक के करीब 3 मिलियन वार्षिक मामलों का उल्लेख किया गया है।

लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण सावधानी जरूरी है। सोशल मीडिया पर “अब 20-25 साल के हर व्यक्ति को हार्ट अटैक हो रहा है” या “हार्ट अटैक की उम्र खत्म हो गई है” जैसी बातें तथ्य नहीं मानी जा सकतीं। युवाओं में मामले गंभीर चिंता का विषय हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर उम्रवार लगातार बढ़ोतरी साबित करने के लिए व्यापक और लगातार निगरानी वाले आंकड़ों की जरूरत होती है।

युवाओं में आखिर खतरा क्यों?

कम उम्र में हार्ट अटैक होने के पीछे एक नहीं, कई कारण हो सकते हैं। भारतीय अध्ययनों में धूम्रपान या तंबाकू, उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, खराब लिपिड प्रोफाइल, पेट के आसपास अधिक चर्बी, पारिवारिक इतिहास और अन्य जोखिम सामने आए हैं। पश्चिमी भारत के YOUTH Registry में 40 वर्ष या उससे कम उम्र के STEMI मरीजों में तंबाकू सेवन प्रमुख जोखिम कारकों में था।

एक उत्तर भारतीय अध्ययन में 40 वर्ष से कम उम्र के ACS मरीजों में धूम्रपान, हाई ब्लड प्रेशर, परिवार में समय से पहले कोरोनरी बीमारी और डायबिटीज प्रमुख जोखिम कारकों में पाए गए। इससे यह समझना जरूरी है कि युवा होना अपने आप में “हार्ट प्रोटेक्शन” नहीं है।

किस उम्र में ज्यादा खतरा?

जोखिम उम्र के साथ बढ़ता है, लेकिन कोई ऐसी निश्चित उम्र नहीं है जिसके नीचे हार्ट अटैक हो ही नहीं सकता। कुछ युवाओं में जन्मजात हृदय संबंधी समस्या, आनुवंशिक कोलेस्ट्रॉल समस्या, धमनियों की असामान्य स्थिति, रक्त जमने की प्रवृत्ति या अन्य बीमारियां भी भूमिका निभा सकती हैं।

भारत में 30 वर्ष से कम उम्र के हार्ट अटैक मरीजों पर किए गए एक अस्पताल अध्ययन में भी डिस्लिपिडेमिया, तंबाकू, मोटापा और धूम्रपान जैसे जोखिम मिले थे। इसका मतलब यह नहीं कि हर युवा इन कारणों से जोखिम में है, बल्कि यह कि कम उम्र में भी जोखिम की पहचान संभव और जरूरी है।

तस्वीर में बताए गए “5 संकेत” कितने सही हैं?

वायरल स्वास्थ्य तस्वीरों में अक्सर कहा जाता है कि हार्ट अटैक से “ठीक दो दिन पहले” पांच लक्षण दिखाई देते हैं। यह दावा इस रूप में वैज्ञानिक रूप से स्थापित नहीं है। हार्ट अटैक के लक्षण व्यक्ति-व्यक्ति में अलग हो सकते हैं और जरूरी नहीं कि दो दिन पहले कोई निश्चित पांच संकेत दिखाई दें।

NHLBI के अनुसार लक्षण धीरे-धीरे शुरू हो सकते हैं, हल्के हो सकते हैं या कई घंटों में आते-जाते रह सकते हैं। कुछ हार्ट अटैक बिना स्पष्ट लक्षणों के भी होते हैं, जिन्हें “silent heart attack” कहा जाता है।

इसलिए तस्वीर में पसीना, बाजू या जबड़े में दर्द, सांस फूलना, चक्कर और पेट में जलन जैसी बातों को संभावित चेतावनी संकेत के रूप में समझना ठीक है, लेकिन इन्हें “हार्ट अटैक से ठीक 48 घंटे पहले आने वाले पांच पक्के संकेत” कहना गलत होगा।

कौन-कौन से लक्षण नजरअंदाज नहीं करने चाहिए?

सीने में दबाव, जकड़न या दर्द हार्ट अटैक का प्रमुख संकेत हो सकता है। दर्द केवल सीने तक सीमित नहीं रहता और बांह, कंधे, पीठ, गर्दन या जबड़े तक पहुंच सकता है। सांस फूलना, ठंडा पसीना, कमजोरी, चक्कर, मितली या उल्टी भी हो सकती है।

महिलाओं और कुछ अन्य मरीजों में लक्षण अलग या कम स्पष्ट हो सकते हैं। असामान्य थकान, सांस फूलना, मितली, पीठ या जबड़े में दर्द को केवल गैस या कमजोरी मानकर टालना ठीक नहीं है।

अगर किसी व्यक्ति में अचानक ऐसे लक्षण दिखाई दें जिनसे हार्ट अटैक की आशंका हो, तो घरेलू इलाज या इंतजार करने के बजाय तुरंत स्थानीय आपात चिकित्सा सेवा से संपर्क करना चाहिए। हार्ट अटैक में समय बहुत महत्वपूर्ण होता है।

हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट एक ही चीज नहीं

अचानक मौत की खबरों में “हार्ट अटैक” और “कार्डियक अरेस्ट” को कई बार एक ही मान लिया जाता है। दोनों अलग स्थितियां हैं। हार्ट अटैक में हृदय की मांसपेशी तक रक्त पहुंचने में रुकावट होती है, जबकि कार्डियक अरेस्ट में हृदय की प्रभावी धड़कन अचानक बंद हो जाती है।

हार्ट अटैक कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकता है, लेकिन हर हार्ट अटैक में कार्डियक अरेस्ट नहीं होता। इसके अलावा कुछ खतरनाक हार्ट रिदम, आनुवंशिक विद्युत विकार और अन्य स्थितियां भी कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकती हैं।

कोरोना के बाद हार्ट अटैक—कितना सच?

कोविड-19 और हृदय संबंधी समस्याओं के बीच संबंध पर गंभीर वैज्ञानिक शोध हुआ है। 2022 में प्रकाशित एक बड़े अमेरिकी अध्ययन में कोविड-19 से संक्रमित लोगों में संक्रमण के बाद विभिन्न हृदय-रक्तवाहिका समस्याओं का जोखिम बढ़ा हुआ पाया गया था। अध्ययन में यह जोखिम हल्के संक्रमण के बाद भी देखा गया, हालांकि गंभीर बीमारी के साथ जोखिम अधिक था।

हाल के स्वीडिश अध्ययन में 40 से 75 वर्ष के 40 लाख से अधिक लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। उसमें कोविड के बाद कई हृदय संबंधी परिणामों का जोखिम बढ़ा मिला, लेकिन जोखिम बीमारी की गंभीरता और अन्य परिस्थितियों से प्रभावित था। एक अन्य विश्लेषण में लंबे समय तक जोखिम विशेष रूप से अस्पताल में भर्ती हुए मरीजों में अधिक स्पष्ट रहा।

इसलिए दो बातें अलग-अलग रखना जरूरी है। कोविड के बाद हृदय संबंधी जोखिम पर वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद हैं, लेकिन यह कहना कि आज होने वाला हर हार्ट अटैक कोविड के कारण है, उपलब्ध प्रमाण से साबित नहीं होता। वैक्सीन, कोविड संक्रमण, जीवनशैली और अन्य जोखिमों को लेकर किसी व्यक्ति के मामले में निष्कर्ष डॉक्टर और उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।

रहन-सहन और खान-पान कितना जिम्मेदार?

आज की जीवनशैली में लंबे समय तक बैठना, शारीरिक गतिविधि कम होना, धूम्रपान या तंबाकू, अधिक नमक, ज्यादा मीठा, अत्यधिक प्रोसेस्ड भोजन, अस्वास्थ्यकर वसा, मोटापा और शराब का हानिकारक सेवन हृदय जोखिम बढ़ाने वाले प्रमुख कारक हैं। WHO इन्हें हृदय रोग के प्रमुख व्यवहार संबंधी जोखिमों में गिनता है।

WHO वयस्कों के लिए प्रतिदिन के नमक को 5 ग्राम से कम रखने की सलाह देता है। भोजन में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और अन्य पौष्टिक खाद्य शामिल करना तथा अत्यधिक नमक, चीनी और अस्वास्थ्यकर वसा को सीमित करना हृदय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।

शारीरिक गतिविधि भी जरूरी है। WHO के अनुसार 18–64 वर्ष के वयस्कों को सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम तीव्रता की या 75 मिनट तेज गतिविधि करनी चाहिए। अतिरिक्त लाभ के लिए मध्यम गतिविधि को 300 मिनट तक बढ़ाया जा सकता है और सप्ताह में कम से कम दो दिन मांसपेशियों को मजबूत करने वाली गतिविधि की जा सकती है।

हवा भी दिल पर असर डालती है

हृदय की बीमारी केवल खाने और व्यायाम का विषय नहीं है। वायु प्रदूषण भी महत्वपूर्ण पर्यावरणीय जोखिम है। WHO के अनुसार PM2.5 जैसे सूक्ष्म कण फेफड़ों में गहराई तक पहुंच सकते हैं और रक्तप्रवाह में प्रवेश कर हृदय तथा रक्तवाहिका प्रणाली को प्रभावित कर सकते हैं।

WHO की 2026 की तकनीकी रिपोर्ट के अनुसार वायु प्रदूषण दुनिया का प्रमुख पर्यावरणीय स्वास्थ्य जोखिम है और इसका संबंध हृदय तथा श्वसन रोगों सहित कई गैर-संचारी रोगों से है। इसलिए प्रदूषण वाले वातावरण में लंबे समय तक रहने वाले लोगों के लिए हवा की गुणवत्ता भी स्वास्थ्य चर्चा का हिस्सा होनी चाहिए।

पानी, दवाइयां और “छिपी” बीमारी का क्या असर?

पीने का असुरक्षित पानी सीधे हर हार्ट अटैक का कारण है—ऐसा सामान्य दावा वैज्ञानिक रूप से नहीं किया जा सकता। लेकिन दूषित वातावरण, खराब स्वच्छता और कुछ विशेष संक्रमण या रासायनिक एक्सपोजर स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए “पानी ही हार्ट अटैक की वजह है” जैसे सामान्य निष्कर्ष से बचना चाहिए।

दवाओं के मामले में भी सावधानी जरूरी है। उदाहरण के लिए कुछ NSAID दर्द निवारक दवाओं से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ सकता है, खासकर कुछ लोगों और कुछ परिस्थितियों में। इसलिए दर्द की दवा या सप्लीमेंट को लंबे समय तक अपनी मर्जी से लेना उचित नहीं है।

“छिपी बीमारी” का मतलब अक्सर ऐसी समस्या से हो सकता है जिसके लक्षण शुरुआत में स्पष्ट नहीं होते—जैसे हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, किडनी की बीमारी या कुछ हृदय संबंधी विकार। WHO के अनुसार रक्तचाप, रक्त शर्करा और रक्त में लिपिड की जांच से ऐसे जोखिमों की पहचान पहले की जा सकती है।

मानसिक तनाव और नींद को भी नजरअंदाज न करें

लगातार मानसिक तनाव शरीर में हार्मोनल और शारीरिक प्रतिक्रियाएं पैदा कर सकता है। तनाव के कारण नींद खराब हो सकती है, धूम्रपान या ज्यादा खाने जैसी आदतें बढ़ सकती हैं और ब्लड प्रेशर प्रभावित हो सकता है। इसलिए तनाव को केवल “दिमाग की समस्या” मानकर छोड़ देना सही नहीं है।

मानसिक स्वास्थ्य और हृदय स्वास्थ्य के बीच संबंध पर चिकित्सा विज्ञान लगातार अध्ययन कर रहा है। चिंता, अवसाद और लंबे समय का तनाव हृदय रोग के जोखिम से जुड़े पाए गए हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि तनाव अकेले किसी व्यक्ति के हार्ट अटैक का कारण साबित हो जाता है।

सेक्स समस्या भी कभी-कभी चेतावनी हो सकती है

यौन समस्या को लेकर शर्म या संकोच के कारण कई लोग डॉक्टर से बात नहीं करते। खासकर पुरुषों में erectile dysfunction यानी इरेक्शन की समस्या कभी-कभी रक्तवाहिका संबंधी बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकती है। यूरोपियन यूरोलॉजी गाइडलाइन इसे हृदय रोग के जोखिम से जोड़ती है और ऐसे मरीजों में कार्डियोवैस्कुलर जोखिम का मूल्यांकन महत्वपूर्ण मानती है।

लेकिन यहां भी भ्रम से बचना जरूरी है। सेक्स या erectile dysfunction को सीधे हार्ट अटैक का कारण नहीं कहा जा सकता। इसके पीछे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, दवाएं, मानसिक तनाव, हार्मोन और रक्तवाहिका संबंधी समस्या सहित कई कारण हो सकते हैं।

सरकार और स्वास्थ्य व्यवस्था क्या कर रही है?

भारत सरकार का National Programme for Prevention and Control of Non-Communicable Diseases (NP-NCD) हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और अन्य गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग और प्रबंधन पर काम करता है। 2025-26 के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन दस्तावेज में 30 वर्ष से अधिक उम्र की आबादी के लिए जनसंख्या-आधारित स्क्रीनिंग और हाइपरटेंशन, डायबिटीज, STEMI, स्ट्रोक आदि के समय पर प्रबंधन का उल्लेख है।

सरकारी व्यवस्था में Ayushman Arogya Mandir के माध्यम से भी गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग, स्वास्थ्य जागरूकता, दवाओं की उपलब्धता और प्राथमिक स्तर पर देखभाल को बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। 1 अक्टूबर 2026 के आधिकारिक पोर्टल पर 1,87,167 Functional Ayushman Arogya Mandir दर्ज थे।

हार्ट अटैक के आपात इलाज में समय की अहमियत को देखते हुए सरकार ने STEMI के लिए दिशानिर्देश भी जारी किए हैं। इनमें संदिग्ध मरीजों में ECG और कार्डियक ट्रोपोनिन जैसी जांच तथा जल्दी उपचार की व्यवस्था पर जोर है। सरकारी दिशानिर्देश यह भी बताते हैं कि भारत में देर से अस्पताल पहुंचना STEMI उपचार की बड़ी चुनौतियों में शामिल है।

स्वस्थ रहने के लिए आम व्यक्ति क्या करे?

सबसे पहले यह धारणा बदलनी होगी कि बीमारी केवल बूढ़े लोगों को होती है। परिवार में कम उम्र में हार्ट अटैक का इतिहास हो, धूम्रपान या तंबाकू की आदत हो, मोटापा, हाई BP, डायबिटीज या हाई कोलेस्ट्रॉल हो तो उम्र कम होने पर भी चिकित्सकीय जोखिम मूल्यांकन महत्वपूर्ण है।

नियमित रूप से ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और लिपिड प्रोफाइल जैसी आवश्यक जांच कराना उपयोगी है। डॉक्टर जोखिम के आधार पर ECG, इको, स्ट्रेस टेस्ट या अन्य जांच की सलाह दे सकते हैं। हर स्वस्थ व्यक्ति को बिना कारण महंगे कार्डियक टेस्ट कराने की जरूरत नहीं होती; जांच व्यक्ति के जोखिम और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार होनी चाहिए।

धूम्रपान और तंबाकू छोड़ना, नियमित चलना या व्यायाम करना, वजन नियंत्रित रखना, पर्याप्त नींद लेना, भोजन में नमक-चीनी और अस्वास्थ्यकर वसा सीमित करना तथा शराब के हानिकारक सेवन से बचना हृदय जोखिम कम करने की बुनियादी रणनीतियां हैं।

एक बात हमेशा याद रखें

अगर अचानक सीने में दबाव या दर्द, सांस फूलना, ठंडा पसीना, जबड़े या बांह में दर्द, बेहोशी जैसा महसूस होना, तेज कमजोरी या असामान्य सांस की समस्या हो तो इसे केवल गैस, थकान या तनाव समझकर घर पर इंतजार न करें। हार्ट अटैक का संदेह हो तो तत्काल आपात चिकित्सा सहायता लें।

आज की सबसे बड़ी जरूरत डर फैलाना नहीं, बल्कि समय रहते जोखिम पहचानना है। हार्ट अटैक के लिए कोई एक कारण जिम्मेदार नहीं होता और न ही हर अचानक मौत को हार्ट अटैक कहा जा सकता है। कोविड-19 के बाद हृदय जोखिम पर शोध जरूर सामने आया है, लेकिन किसी व्यक्ति की मृत्यु का कारण मेडिकल जांच के बिना तय नहीं किया जा सकता।

युवाओं के लिए संदेश भी साफ है—फिट दिखना और वास्तव में हृदय संबंधी जोखिम कम होना दो अलग बातें हैं। तंबाकू, हाई BP, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल, मोटापा, खराब खान-पान, निष्क्रिय जीवनशैली, प्रदूषण, नींद और लंबे तनाव पर ध्यान देना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। यह किसी व्यक्ति के लिए निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। किसी भी गंभीर या अचानक लक्षण में तुरंत डॉक्टर/आपात चिकित्सा सेवा से संपर्क करें। अपनी दवा डॉक्टर की सलाह के बिना बंद या शुरू न करें।

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