हरियाणा धान खरीद: शाहाबाद के बाद क्या बदला?

हरियाणा धान खरीद: शाहाबाद के बाद क्या बदला?

हरियाणा धान खरीद: शाहाबाद के बाद क्या बदला?

शाहाबाद-कुरुक्षेत्र में धान खरीद को लेकर किसानों और प्रशासन के बीच टकराव के बाद अब रास्ता बातचीत से निकला है। 25 सितंबर से गेट पास जारी करने और मंडियों में खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि इस साल धान की सरकारी खरीद समय पर और बिना परेशानी के कितनी तेजी से हो पाएगी।

शशि अरोड़ा/ कुरुक्षेत्र/ 24 सितंबर/24 सितम्बर 2026 /जनता आवाज़ न्यूज रिसोर्स

हरियाणा में धान की सरकारी खरीद को लेकर पिछले कुछ दिनों से चल रहा तनाव शाहाबाद में बातचीत के बाद फिलहाल थम गया है। कुरुक्षेत्र जिले के शाहाबाद में किसानों ने खरीद शुरू कराने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। मंगलवार को प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग-44 की ओर बढ़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने बैरिकेडिंग की और आंसू गैस तथा वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इसके बाद किसान शाहाबाद-बराड़ा मार्ग पर धरने पर बैठ गए।

बुधवार को प्रशासन और किसान नेताओं के बीच बातचीत हुई। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के महानिदेशक अंशज सिंह, कुरुक्षेत्र के उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा और भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी समेत अन्य प्रतिनिधियों की बैठक में खरीद प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। इसके बाद किसानों ने धरना समाप्त करने और सड़क यातायात सामान्य करने का फैसला किया।

25 सितंबर से गेट पास, मंडी में पहले से पहुंची फसल का क्या होगा?

कुरुक्षेत्र प्रशासन के अनुसार 25 सितंबर से खरीद केंद्रों पर किसानों को गेट पास जारी किए जाएंगे। जिन किसानों की धान की फसल पहले ही मंडियों में पहुंच चुकी है, उनके लिए मंडी में ही बायोमेट्रिक और दूसरी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कराने की व्यवस्था की जाएगी। इसका उद्देश्य यह है कि किसान अपनी पहले से लाई गई फसल को दोबारा लोड करके मंडी के गेट तक न ले जाएं।

कुरुक्षेत्र के उपायुक्त के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि मंगलवार तक जिले के विभिन्न केंद्रों पर करीब 22,000 मीट्रिक टन धान पहुंच चुका था। इतनी बड़ी मात्रा में फसल मंडियों में आने के कारण किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह थी कि सरकारी खरीद कब शुरू होगी और मंडियों में पड़ी फसल का भुगतान किस प्रक्रिया के तहत होगा। अब प्रशासन ने इस फसल की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए मंडी स्तर पर सत्यापन की व्यवस्था बताई है।

यह मामला केवल शाहाबाद या कुरुक्षेत्र तक सीमित नहीं है। हरियाणा के कई हिस्सों में धान की शुरुआती आवक शुरू हो चुकी है और किसान मंडियों की ओर पहुंच रहे हैं। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने 23 सितंबर को बताया था कि राज्य में 249 मंडियां हैं और कुछ मंडियों में धान की आवक शुरू हो चुकी है। किसानों द्वारा ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर दर्ज फसल का सत्यापन किया जा रहा है।

विवाद की असली वजह क्या थी?

इस पूरे विवाद की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी सरकारी खरीद की तारीख है। केंद्र सरकार के निर्धारित खरीद कार्यक्रम के अनुसार सामान्य रूप से धान की खरीद 1 अक्टूबर से शुरू होनी थी। लेकिन हरियाणा के कुछ धान उत्पादक क्षेत्रों में कम अवधि वाली किस्मों की फसल पहले तैयार हो जाती है। किसानों का तर्क रहा कि जब फसल मंडी में पहुंच चुकी है तो सरकारी खरीद शुरू होने में देरी से उन्हें परेशानी हो सकती है।

किसानों की मांग केवल खरीद की घोषणा तक सीमित नहीं थी। वे चाहते थे कि मंडी में पहुंची फसल की तौल और खरीद की प्रक्रिया तुरंत शुरू हो, ताकि फसल खुले में पड़ी न रहे और किसानों को निजी खरीदारों पर निर्भर न होना पड़े। शाहाबाद में हुआ प्रदर्शन इसी मांग के व्यापक दबाव का हिस्सा था। मंगलवार को स्थिति उस समय तनावपूर्ण हुई जब प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग की ओर बढ़ने की कोशिश की।

सरकार की तरफ से यह बताया गया कि खरीद की तैयारियां पहले से चल रही थीं। कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा था कि मंडियों में व्यवस्था तैयार है और किसानों की दर्ज फसल का सत्यापन किया जा रहा है। बड़ी संख्या में फसलों का सत्यापन सैटेलाइट के माध्यम से हुआ है, जबकि बाकी मामलों में मैनुअल सत्यापन की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

MSP कितना है और किसान के लिए इसका महत्व क्या है?

2026-27 विपणन सीजन के लिए केंद्र सरकार ने धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि की है। सामान्य धान का MSP ₹2,441 प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए धान का MSP ₹2,461 प्रति क्विंटल निर्धारित है। केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार 2025-26 में सामान्य धान का MSP ₹2,369 प्रति क्विंटल था। यानी सामान्य धान के MSP में इस सीजन ₹72 प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई है।

केंद्र सरकार के आधिकारिक आंकड़ों में 2026-27 के लिए सामान्य धान की उत्पादन लागत ₹1,627 प्रति क्विंटल बताई गई है। इसके मुकाबले MSP ₹2,441 है। सरकारी गणना के अनुसार MSP उत्पादन लागत से 50 प्रतिशत अधिक है। यह आंकड़ा केंद्र सरकार की लागत-गणना पर आधारित है; किसान संगठनों द्वारा खेती की वास्तविक लागत को लेकर अलग-अलग आकलन और दावे किए जाते रहे हैं।

इसलिए धान खरीद का सवाल केवल मंडी में बोली लगने या तौल शुरू होने का सवाल नहीं है। किसान के लिए यह इस बात से जुड़ा है कि उसे अपनी उपज का निर्धारित समर्थन मूल्य वास्तव में किस प्रक्रिया से मिलेगा, भुगतान कितनी जल्दी होगा और मंडी में फसल लाने से लेकर खरीद पूरी होने तक उसे कितनी प्रशासनिक औपचारिकताओं से गुजरना पड़ेगा।

इस बार ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ क्यों महत्वपूर्ण है?

हरियाणा में इस साल खरीद व्यवस्था में फसल के पंजीकरण और सत्यापन को विशेष महत्व दिया जा रहा है। कृषि मंत्री के अनुसार ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर किसानों द्वारा दर्ज फसल का सत्यापन किया जा रहा है। इसके लिए सैटेलाइट सत्यापन के साथ-साथ जरूरत के अनुसार मैनुअल सत्यापन भी किया जा रहा है।

सरकार का कहना है कि सत्यापन के बाद औसत उत्पादन के आधार पर खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इसके साथ मंडियों में जियो-फेंसिंग की व्यवस्था भी लागू की गई है और गेट पास की प्रक्रिया को नियंत्रित तरीके से चलाने की तैयारी है। इससे खरीद में वास्तविक किसान और वास्तविक फसल की पहचान को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

हालांकि किसानों के लिए असली परीक्षा व्यवस्था के जमीन पर काम करने की होगी। यदि मंडी में हजारों क्विंटल फसल एक साथ पहुंचती है, तो गेट पास, तौल, नमी जांच, उठान, भंडारण और भुगतान की पूरी श्रृंखला को एक साथ सुचारू रखना जरूरी होगा। किसी एक स्तर पर देरी होने पर उसका असर सीधे किसान पर पड़ सकता है।

अगले साल 15 सितंबर से खरीद शुरू करने की बात

शाहाबाद में हुए समझौते का एक महत्वपूर्ण हिस्सा अगले सीजन से जुड़ा है। अधिकारियों की ओर से किसानों को बताया गया कि राज्य सरकार केंद्र के साथ मिलकर ऐसी नीति बनाने का प्रयास करेगी जिससे इस क्षेत्र में अगले साल 15 सितंबर से धान की अग्रिम खरीद शुरू हो सके। इसके पीछे तर्क यह है कि कुरुक्षेत्र और आसपास के इलाकों में कम अवधि वाली धान की कुछ किस्में अपेक्षाकृत जल्दी तैयार हो जाती हैं।

इसका अर्थ यह नहीं है कि अगले साल 15 सितंबर से खरीद अपने आप शुरू हो जाएगी। इसके लिए केंद्र और राज्य के स्तर पर नीति तथा खरीद कार्यक्रम में आवश्यक निर्णय होना होगा। फिलहाल इसे अगले सीजन के लिए आगे बढ़ाए जाने वाले प्रस्ताव और आश्वासन के रूप में देखा जाना चाहिए।

यही वजह है कि इस साल का विवाद भविष्य की खरीद व्यवस्था पर भी असर डाल सकता है। यदि शुरुआती फसल की आवक और आधिकारिक खरीद शुरू होने की तारीख में अंतर रहता है तो मंडियों पर दबाव बढ़ सकता है। दूसरी तरफ यदि खरीद कार्यक्रम फसल की वास्तविक परिपक्वता के अनुसार बनाया जाता है तो किसानों और प्रशासन दोनों के सामने शुरुआती दिनों की अव्यवस्था कम करने की संभावना रहती है।

शाहाबाद से आगे हरियाणा की मंडियों के लिए क्या संदेश?

शाहाबाद की घटना ने एक बात साफ कर दी है कि धान खरीद केवल कृषि विभाग का विषय नहीं है। इसमें मंडी प्रशासन, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, खरीद एजेंसियां, राजस्व अधिकारी, पुलिस, परिवहन व्यवस्था और किसान—सभी की भूमिका होती है। एक जगह पर देरी या अस्पष्टता होने पर उसका असर पूरी खरीद श्रृंखला पर पड़ सकता है।

राज्य सरकार ने 23 सितंबर को सभी जिलों के उपायुक्तों के साथ धान और बाजरे की खरीद व्यवस्था को लेकर समीक्षा बैठक भी की थी। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा और संबंधित अधिकारियों ने खरीद तैयारियों की समीक्षा की। इससे संकेत मिलता है कि सरकार राज्यभर में मंडियों की तैयारी और खरीद व्यवस्था को लेकर जिला स्तर पर निगरानी कर रही है।

हरियाणा सरकार की तरफ से मंडियों और खरीद व्यवस्था को लेकर अलग-अलग जिलों में तैयारियां पूरी करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। फतेहाबाद प्रशासन ने 22 सितंबर को मंडियों में आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। इसी तरह अन्य जिलों में भी खरीद व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है।

धान की कटाई के समय पर भी नई व्यवस्था

धान खरीद के साथ इस बार कटाई के समय को लेकर भी प्रशासनिक निर्देश जारी हुए हैं। झज्जर जिले में 24 सितंबर को जारी आदेश के अनुसार शाम 6 बजे से सुबह 10 बजे तक कंबाइन हार्वेस्टर से धान की कटाई पर रोक लगाई गई है। आदेश का उद्देश्य धान की कटाई और मंडियों में आवक को व्यवस्थित रखना बताया गया है।

इस तरह किसान के लिए इस सीजन में केवल यह जानना पर्याप्त नहीं होगा कि MSP कितना है। उसे यह भी देखना होगा कि उसकी फसल का पंजीकरण सही है या नहीं, सत्यापन पूरा हुआ है या नहीं, मंडी में गेट पास की व्यवस्था क्या है, नमी के मानक क्या हैं और प्रशासन ने कटाई तथा मंडी आवक को लेकर क्या स्थानीय निर्देश जारी किए हैं।

अब आगे सबसे अहम सवाल

शाहाबाद में धरना खत्म होने से तत्काल तनाव जरूर कम हुआ है, लेकिन धान खरीद की वास्तविक परीक्षा अब मंडियों में होगी। 25 सितंबर से गेट पास जारी होने और पहले से मंडियों में पहुंची फसल की प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद यह देखना होगा कि तौल, खरीद, उठान और भुगतान कितनी तेजी से चलता है। कुरुक्षेत्र में करीब 22,000 मीट्रिक टन धान पहले ही पहुंचने की सूचना बताती है कि प्रशासन के सामने शुरुआती दबाव कम नहीं है।

किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकारी खरीद की प्रक्रिया स्पष्ट और पारदर्शी रहे। प्रशासन के लिए चुनौती यह है कि मंडियों में भीड़ और फसल की आवक को नियंत्रित रखते हुए किसानों को अनावश्यक इंतजार न करना पड़े। वहीं केंद्र और राज्य के बीच खरीद की तारीख को लेकर समन्वय भविष्य में ऐसे विवादों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

शाहाबाद की घटना को केवल एक स्थानीय किसान आंदोलन के रूप में देखने के बजाय इसे हरियाणा की मंडी व्यवस्था, MSP पर खरीद और फसल की वास्तविक आवक के बीच तालमेल के सवाल के रूप में भी देखा जा सकता है। इस साल के अनुभव से यह तय होगा कि अगले सीजन के लिए खरीद कैलेंडर, डिजिटल सत्यापन और मंडी प्रबंधन में क्या बदलाव किए जाते हैं।

फिलहाल किसानों और प्रशासन के बीच सहमति के बाद रास्ता खुला है। अब असली कसौटी कागज पर बनी व्यवस्था नहीं, बल्कि मंडी में खड़ी किसान की ट्रॉली और उसकी फसल की वास्तविक खरीद है। 25 सितंबर से गेट पास की शुरुआत और उसके बाद खरीद प्रक्रिया की गति यह बताएगी कि शाहाबाद के टकराव के बाद व्यवस्था कितनी तेजी से जमीन पर उतरती है।

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