ग्लोबल crop prices में 30 प्रतिशत तक की तेजी, फिर भी agrochemical demand क्यों बनी हुई है कमजोर

जेफरीज की रिपोर्ट के अनुसार सितंबर तिमाही में वैश्विक crop prices में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। गेहूं के prices में सालाना आधार पर 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
लेकिन भारत में कमजोर मानसून और विदेशी बाजारों में हीट वेव के कारण agrochemical demand अभी भी कमजोर बनी हुई है। इस स्थिति का असर agrochemical manufacturers के सितंबर तिमाही के earnings पर पड़ने की संभावना है।
- गेहूं, सोयाबीन और मक्का के prices में सालाना आधार पर क्रमशः 30 प्रतिशत, 22 प्रतिशत और 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
- चीन के crop protection export volume में QTD2QFY27 के दौरान सालाना आधार पर 15 प्रतिशत की गिरावट आई है।
- ग्लाइफोसेट के prices में सालाना आधार पर 5 प्रतिशत की तेजी आई है।
- यूरिया के prices में 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है और डीएपी यानी डायमोनियम फॉस्फेट के prices में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
क्यों बढ़ गए वैश्विक crop prices
ब्लैक सी में सप्लाई चेन से जुड़ी बाधाओं और मिडिल ईस्ट संघर्ष के कारण सितंबर तिमाही में गेहूं, सोयाबीन और मक्का के prices में क्रमशः 30 प्रतिशत, 22 प्रतिशत और 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। कृषि इनपुट के prices में सप्लाई चेन के ठीक होने के कारण अपेक्षाकृत मामूली बदलाव देखने को मिले हैं।
ग्लोबल agrochemical demand में सुस्ती
ग्लोबल crop prices में बढ़ोतरी के बावजूद वैश्विक agrochemical demand सुस्त रही है। चीनी crop protection exports में आई भारी गिरावट से यह बात स्पष्ट होती है। लगभग ढाई साल की तेज ग्रोथ के बाद आई इस गिरावट से वैश्विक मांग के कमजोर होने का संकेत मिलता है।
भारतीय agrochemical कंपनियों के earnings पर असर
कमजोर मांग का असर भारतीय agrochemical कंपनियों के सितंबर तिमाही के earnings पर भी पड़ने की उम्मीद है। जेफरीज के अनुमान के मुताबिक कमजोर एक्सपोर्ट और सुस्त घरेलू मांग के चलते PI Industries का revenue सालाना आधार पर 8 प्रतिशत घट सकता है। कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट यानी EBITDA 30 प्रतिशत तक गिर सकता है। इसी तरह UPL के revenue में 5 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान जताया गया है और उसका EBITDA भी 6 प्रतिशत तक कम हो सकता है।
UPL और अन्य कंपनियों का अनुमान
- कमजोर मानसून के कारण भारत में UPL के volume में डबल डिजिट की गिरावट आने की उम्मीद है।
- लैटिन अमेरिका में भी कंपनी की इन्वेंट्री रणनीति में बदलाव के बीच volume में डबल डिजिट की गिरावट आ सकती है।
- बढ़ते global crop prices और आसान होती सप्लाई चेन के बावजूद agrochemical manufacturers के लिए मांग का माहौल अभी भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।