भारत का राजकोषीय मार्ग प्रत्यक्ष टैक्स ग्रोथ पर निर्भर करेगा, डोलत कैपिटल की रिपोर्ट में खुलासा

भारत की राजकोषीय स्थिति और भविष्य की चाल मुख्य रूप से प्रत्यक्ष टैक्स कलेक्शंस की मजबूती पर निर्भर करेगी। डोलत कैपिटल की एक रिपोर्ट के अनुसार, कम कस्टम ड्यूटी और कमजोर एक्साइज रेवेन्यू के कारण इनडायरेक्ट टैक्स रिसिप्ट्स पर दबाव आ सकता है। इस बीच सरकार का खर्च इस वित्तीय वर्ष के शुरुआती पांच महीनों में पिछले साल की तुलना में आगे बना हुआ है।
सरकार के खर्च में इस तेजी की मुख्य वजहें हायर कैपिटल एक्सपेंडिचर और सब्सिडी हैं। इस स्थिति के चलते प्राइमरी डेफिसिट बजट अनुमान का 67 प्रतिशत तक पहुंच गया है। पिछले साल की समान अवधि में यह आंकड़ा 23 प्रतिशत पर था।
- अगस्त 2026 तक राजकोषीय घाटा 7.1 ट्रिलियन रुपये यानी बजट अनुमान का 41.9 प्रतिशत रहा।
- पिछले साल इसी अवधि में राजकोषीय घाटा 5.9 ट्रिलियन रुपये था, जो 18.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दिखाता है।
- कुल खर्च साल-दर-साल 10.1 प्रतिशत बढ़कर 20.7 ट्रिलियन रुपये पर पहुंच गया।
- कैपेक्स यानी पूंजीगत खर्च 18.6 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 5.1 ट्रिलियन रुपये हो गया।
- सब्सिडी बिल बजट अनुमान के 37 प्रतिशत तक पहुंच गया, जबकि पिछले साल यह 30 प्रतिशत था।
राजस्व और टैक्स कलेक्शंस की स्थिति
राजस्व पक्ष की बात करें तो कुल प्राप्तियां साल-दर-साल 7 प्रतिशत बढ़कर 13.7 ट्रिलियन रुपये हो गईं। नेट टैक्स रिसिप्ट्स 2.04 प्रतिशत बढ़कर 8.3 ट्रिलियन रुपये हो गईं। नॉन-टैक्स रिसिप्ट्स 9.7 प्रतिशत बढ़कर 4.5 ट्रिलियन रुपये हो गईं। नॉन-डेट कैपिटल रिसिप्ट्स में 135 प्रतिशत की भारी तेजी दर्ज की गई और यह 0.8 ट्रिलियन रुपये पर पहुंच गईं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि मजबूत कॉरपोरेट और इनकम टैक्स कलेक्शंस के कारण टैक्स कलेक्शंस ने कुल मिलाकर पिछले साल की गति को बनाए रखा है। मजबूत नॉन-टैक्स रेवेन्यू और नॉन-डेट कैपिटल रिसिप्ट्स ने सरकार के कैश फ्लो को सपोर्ट किया है। इससे शुरुआती खर्च में आई तेजी के असर को आंशिक रूप से संतुलित करने में मदद मिली है।
भविष्य के लिए अहम मॉनिटर करने योग्य बातें
डोलत कैपिटल की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार के वित्तपोषण के लिए मुख्य रूप से यह देखना होगा कि क्या प्रत्यक्ष टैक्स कलेक्शंस की मजबूती कस्टम और एक्साइज रेवेन्यू से आने वाले दबाव को आगे भी संतुलित रख पाती है। एडिबल ऑयल और शुगर पर कम कस्टम ड्यूटी और कमजोर एक्साइज कलेक्शंस से इनडायरेक्ट टैक्स रेवेन्यू सीमित हो सकते हैं। फूड और फर्टिलाइजर सब्सिडी के ऊंचे आउटले इस साल सब्सिडी खर्च बढ़ने के मुख्य चालक रहे हैं।