ईडी ने फेमा के तहत रिलायंस पावर लिमिटेड की 2,032.81 करोड़ रुपये की संपत्ति की जब्त

ईडी ने फेमा के तहत रिलायंस पावर लिमिटेड की 2,032.81 करोड़ रुपये की संपत्ति की जब्त

एनफोर्समेंट डायरेक्टर यानी ईडी ने बुधवार को कहा कि उसने फॉरन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट यानी फेमा (FEMA) के तहत जारी जांच के सिलसिले में रिलायंस पावर लिमिटेड (RPL) की भारत में स्थित 2,032.81 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर ली है।

यह कार्रवाई बुधवार को फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट, 1999 की धारा 37A के तहत की गई है। एजेंसी के अनुसार ये जब्त संपत्तियां रिलायंस पावर लिमिटेड (RPL) के बैंक बैलेंस और सासन पावर लिमिटेड की शेयरहोल्डिंग शामिल हैं।

  • ईडी ने रिलायंस पावर लिमिटेड की 2,032.81 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की।
  • यह कार्रवाई फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट यानी फेमा (FEMA) के तहत की गई है।
  • जांच सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया यानी सेबी (SEBI) से मिली जानकारी पर शुरू हुई थी।
  • फंड का इस्तेमाल रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप के फायदे के लिए किया गया था।

जांच की शुरुआत और सेबी की भूमिका

एजेंसी ने बताया कि उसकी जांच सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया यानी सेबी (SEBI) से प्राप्त जानकारी के आधार पर शुरू की गई थी। यह जानकारी रिलायंस पावर लिमिटेड द्वारा अपनी बुक्स ऑफ अकाउंट में किए गए 2,101.46 करोड़ रुपये के कुल राइट-ऑफ और प्रावधानों से संबंधित थी।

ईडी ने एक बयान में कहा कि ये राइट-ऑफ ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स यानी BVI और केमैन आइलैंड्स की कंपनियों को दिए गए विदेशी निवेश और एडवांस से जुड़े थे।

विदेशी निवेश और ऋण की प्रक्रिया

संघीय एजेंसी ने इस साल 6 मार्च से 8 मार्च तक फेमा के तहत सर्च भी की थी, जिसमें कई आपत्तिजनक सबूत जब्त किए गए थे और कई लोगों के बयान दर्ज किए गए थे।

जांच से पता चला है कि रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज लिमिटेड (जो अब RPL में मिल चुकी है) ने 275 मिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाए थे, जिसे उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सिंगापुर की सब्सिडियरी रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज (सिंगापुर) प्राइवेट लिमिटेड (RNRL-S) में निवेश किया गया था।

RNRL-S ने इन फंड्स को ड्यूश बैंक (सुइस) एसए, जिनेवा के पास डिपॉजिट के रूप में रखा था। ईडी ने बताया कि इन डिपॉजिट्स को ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में रजिस्टर्ड एंटिटीज को दिए गए लोन के लिए कोलैटरल के रूप में इस्तेमाल किया गया था।

फ्रंट पर्सन के जरिए नियंत्रण और दस्तावेजों की हेराफेरी

जांच में पाया गया कि इन बीवीआई (BVI) एंटिटीज को रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप यानी RAAG द्वारा फ्रंट पर्सन्स के माध्यम से भारत से नियंत्रित और प्रबंधित किया जाता था, जो ग्रुप के निर्देशों के अनुसार काम करते थे।

ईडी की आगे की जांच से पता चला कि लोन की आय का उपयोग मॉरीशस स्थित विदेशी संस्थाओं के माध्यम से भारत में फंड के अस्थायी राउंडट्रिपिंग सहित विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया गया था।

एजेंसी ने यह भी उल्लेख किया कि बीवीआई (BVI) संस्थाएं ड्यूश बैंक द्वारा दिए गए लोन को चुकाने में विफल रहीं। कवर-अप के हिस्से के रूप में, यह दिखाने के लिए दस्तावेज तैयार किए गए थे कि RNRL-S और रिलायंस पावर लिमिटेड की इंडोनेशियाई सब्सिडियरी ने स्पष्ट रूप से वास्तविक व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए इन बीवीआई (BVI) संस्थाओं को एडवांस दिए थे।

दस्तावेजों में हेराफेरी

जांच के दौरान, संघीय एजेंसी ने बताया कि इन ट्रांजैक्शंस को वास्तविक व्यावसायिक लेनदेन के रूप में पेश करने के लिए दस्तावेजों की तारीख पीछे की यानी बैकडेटेड करके तैयार किया गया था।

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