घरेलू स्टील की कीमतें सितंबर में मजबूत रहने की उम्मीद, मांग में सुधार और सप्लाई की कमी दे रही है सहारा

घरेलू स्टील की कीमतें सितंबर में मजबूत रहने की उम्मीद, मांग में सुधार और सप्लाई की कमी दे रही है सहारा

एसबीआईकैप सिक्योरिटीज की एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार सितंबर महीने में घरेलू स्टील की कीमतें मजबूत रहने की उम्मीद है। पोस्ट-मानसून कंस्ट्रक्शन गतिविधि में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है और मेंटेनेंस से जुड़ी सप्लाई की बाधाएं रीबार की कीमतों को अतिरिक्त समर्थन दे रही हैं।

ब्रोकरेज का अनुमान है कि सितंबर में रीबार की कीमतों में एचआरसी यानी हॉट रोल्ड कॉइल की तुलना में अधिक तेजी आएगी। इससे एचआरसी और बीएफ रीबार स्प्रेड में और कमी आएगी क्योंकि सप्लाई की बाधाएं बनी हुई हैं और घरेलू मांग में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है।

घरेलू स्टील की कीमतों की दिशा मुख्य रूप से पोस्ट-मानसून मांग में सुधार की गति और स्टील के निर्यात तथा आयात के बीच के अंतर पर निर्भर करेगी। अगस्त महीने में घरेलू रीबार की कीमतों में तेज सुधार दर्ज किया गया था।

  • औसत बीएफ-रूट रीबार की कीमत महीने-दर-महीने 8.6 प्रतिशत बढ़कर 53,294 रुपये प्रति टन हो गई, जिससे तीन महीने की गिरावट का सिलसिला थम गया।
  • कई इंटीग्रेटेड स्टीलमेकर्स द्वारा योजनाबद्ध मेंटेनेंस के कारण सप्लाई सीमित हो गई थी और कंस्ट्रक्शन गतिविधि में सुधार की उम्मीदों ने मांग को समर्थन दिया।
  • जुलाई के 42 महीने के उच्च स्तर लगभग 8,800 रुपये प्रति टन से घटकर अगस्त में एचआरसी-बीएफ रीबार स्प्रेड लगभग 5,280 रुपये प्रति टन रह गया।
  • अगस्त में औसत मुंबई एचआरसी की कीमत महीने-दर-महीने 1.2 प्रतिशत बढ़कर 58,575 रुपये प्रति टन हो गई।
  • 1 सितंबर को एचआरसी की कीमतें बढ़कर 62,000 रुपये प्रति टन के चार साल के उच्च स्तर पर पहुंच गईं।

जुलाई में भारत की स्टील खपत और उत्पादन के आंकड़े

रिपोर्ट में उद्धृत ज्वाइंट प्लांट कमेटी के आंकड़ों के अनुसार जुलाई में भारत की फिनिश स्टील खपत साल-दर-साल 6.5 प्रतिशत और महीने-दर-महीने 1 प्रतिशत बढ़कर 14.4 मिलियन टन हो गई। फिनिश स्टील का उत्पादन साल-दर-साल 1.4 प्रतिशत बढ़कर 13.7 मिलियन टन हो गया। क्रूड स्टील का उत्पादन 1.2 प्रतिशत बढ़कर 14.3 मिलियन टन हो गया।

जुलाई में स्टील का निर्यात साल-दर-साल 44.1 प्रतिशत बढ़कर 0.7 मिलियन टन हो गया, जबकि आयात 9.5 प्रतिशत बढ़कर 0.7 मिलियन टन हो गया। इससे भारत एक मामूली नेट आयातक बना रहा। रिपोर्ट में कहा गया है कि घरेलू उत्पादकों को चुनिंदा निर्यात बाजारों में चीनी स्टील पर व्यापार प्रतिबंधों का फायदा मिला, हालांकि पहले बुक किए गए कार्गो के कारण एचआरसी का आयात उच्च स्तर पर बना रहा।

नॉन-फेरस मेटल्स की कीमतों में स्थिति

नॉन-फेरस मेटल्स के मामले में रिपोर्ट में कहा गया है कि कम सप्लाई और कम इन्वेंट्री के कारण कीमतें समर्थन प्राप्त करती रहीं। अगस्त में एलएमई एल्युमिनियम, कॉपर और जिंक की कीमतें महीने-दर-महीने क्रमशः 2.9 प्रतिशत, 5.8 प्रतिशत और 7.7 प्रतिशत बढ़ीं। इन धातुओं की इन्वेंट्री में भी गिरावट दर्ज की गई।

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