बंड्स महंगे होने पर भारतीय कंपनियों ने बैंक लोन का रुख किया, फ्रेश क्रेडिट में 81 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज

भारतीय कंपनियां तेजी से बैंक लोन की तरफ रुख कर रही हैं क्योंकि बंड्स के माध्यम से उधारी लेना अधिक महंगा हो गया है। जेफरीज की एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच फ्रेश क्रेडिट में बैंकों की हिस्सेदारी 81 प्रतिशत रही है।
बैंक फाइनेंसिंग की तरफ इस बदलाव के कारण अगस्त में बैंक क्रेडिट ग्रोथ साल-दर-साल 18 प्रतिशत तक तेज हो गई है। इसकी तुलना में नॉन-बैंक क्रेडिट ग्रोथ 10 प्रतिशत दर्ज की गई है क्योंकि कंपनियां अपनी फाइनेंसिंग जरूरतों को पूरा करने के लिए बैंकों पर अधिक निर्भर हो रही हैं।
- नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच फ्रेश क्रेडिट में बैंकों की हिस्सेदारी 81 प्रतिशत रही है।
- अगस्त में बैंक क्रेडिट ग्रोथ साल-दर-साल बढ़कर 18 प्रतिशत हो गई है।
- नॉन-बैंक क्रेडिट ग्रोथ नवंबर 2025 में 12 प्रतिशत से धीमी होकर अगस्त में 10 प्रतिशत पर आ गई है।
- कॉर्पोरेट बैंक क्रेडिट ग्रोथ नवंबर 2025 के 11 प्रतिशत से तेज होकर अगस्त 2026 में 22 प्रतिशत हो गई है।
- जेफरीज ने बैंकों को नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों की तुलना में अधिक प्राथमिकता दी है।
कॉर्पोरेट उधारी में बैंक क्रेडिट की स्थिति
कॉर्पोरेट उधारी में यह बदलाव विशेष रूप से दिखाई दिया जहां बैंक क्रेडिट ग्रोथ नवंबर 2025 के 11 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त 2026 में 22 प्रतिशत हो गई है। नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच इंक्रीमेंटल बैंक लोन में कॉर्पोरेट लोन की हिस्सेदारी लगभग 58 प्रतिशत थी। इस अवधि की शुरुआत में आउटस्टैंडिंग बैंक लोन में इनकी हिस्सेदारी 52 प्रतिशत थी।
रिपोर्ट के अनुसार बैंकों और अन्य फाइनेंसिंग स्रोतों में कुल क्रेडिट ग्रोथ अगस्त 2026 में सुधरकर 16 प्रतिशत हो गई है। कॉर्पोरेट सेक्टर जो हाई वर्किंग कैपिटल और बंड-मार्केट पर निर्भर हैं, वे अपनी क्रेडिट जरूरतों के लिए बैंकों का रुख कर रहे हैं। कॉर्पोरेट बॉन्ड्स, कमर्शियल पेपर और बाहरी स्रोतों से उधारी लेना अपेक्षाकृत अधिक महंगा होने के कारण कंपनियों ने यह कदम उठाया है।
किन सेक्टरों में बैंक लोन की मांग सबसे अधिक रही
रिपोर्ट में उन सेक्टरों की पहचान की गई है जहां बैंक लोन की मजबूत मांग देखने को मिली है। इसमें नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां यानी एनबीएफसी, होलसेल ट्रेड, कमर्शियल रियल एस्टेट, पावर और केमिकल्स शामिल हैं।
- एनबीएफसी को दिया जाने वाला बैंक लोन अगस्त में साल-दर-साल 37 प्रतिशत बढ़ा है।
- होलसेल ट्रेड को मिलने वाला क्रेडिट 26 प्रतिशत बढ़ा है।
- कमर्शियल रियल एस्टेट और केमिकल्स को दिया गया लोन 23 प्रतिशत बढ़ा है।
- पावर सेक्टर को मिलने वाला क्रेडिट 21 प्रतिशत तक बढ़ा है।
बैंक क्रेडिट ग्रोथ की रफ्तार में नरमी की संभावना
जेफरीज का अनुमान है कि दिसंबर 2026 या जनवरी 2027 से बैंक क्रेडिट ग्रोथ की गति धीमी हो सकती है क्योंकि हायर कंपेरिजन बेस का असर सामने आने लगेगा। मार्च 2027 तक बैंकों के लिए क्रेडिट ग्रोथ कम होकर 16 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2028-2029 के लिए 13 प्रतिशत रह सकती है। यह नरमी कॉर्पोरेट बॉन्ड बाजारों और एक्सटर्नल बोर्रोइंग तक बेहतर पहुंच को भी दर्शा सकती है।
फाइनेंसिंग कंडीशंस आसान होने पर कंपनियों की बैंक लोन पर निर्भरता कम हो सकती है। अपेक्षित मंदी के बावजूद जेफरीज ने नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों की तुलना में बैंकों के लिए अनुकूल दृष्टिकोण बनाए रखा है और कहा है कि हम एनबीएफसी की तुलना में बैंकों को प्राथमिकता देते हैं।