भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 7 प्रतिशत पर बरकरार, नीति आयोग के सदस्य अरविंद विरमानी का बयान

नीति आयोग के सदस्य अरविंद विर mani ने इस साल भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 7 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। उन्होंने कहा है कि अर्थव्यवस्था के सामने वैश्विक विकास और अनसुलझे ट्रेड मुद्दों के बीच अनिश्चितता बनी हुई है।
कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव के दौरान बातचीत में विरमानी ने बताया कि उन्होंने इस साल की शुरुआत में अपनी ग्रोथ का अनुमान 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत किया था। उन्होंने इसके साथ ही अनिश्चितता के दायरे को भी बढ़ा दिया था।
- ग्रोथ का अनुमान इस साल के लिए 7 प्रतिशत प्लस या माइनस 1 प्रतिशत है।
- अनिश्चितता को मैक्रोइकोनॉमिक स्थिति का हिस्सा माना गया है।
- पहली तिमाही में वित्त वर्ष 27 के दौरान ग्रोथ 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई थी।
- यूपीआई ट्रांजैक्शन पर एमडीआर को लेकर कॉस्ट-बेस्ड सिस्टम पर जाने की बात कही गई है।
अनिश्चितता और आर्थिक पूर्वानुमान पर विचार
विरमानी ने कहा कि अनिश्चितता मैक्रोइकोनॉमिक जीवन का एक सच है और इसे अनुमानों में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे घटनाक्रम हमेशा हो सकते हैं जिनकी उम्मीद न की गई हो।
उन्होंने लगभग एक महीने पहले अनसुलझे ट्रेड मुद्दों और अन्य वैश्विक कारकों के मद्देनजर अपने अनुमान का दोबारा आकलन किया था। इसके बाद उन्होंने अपने पिछले अनुमान को ही फिर से पुख्ता करने का फैसला किया।
तिमाही आंकड़ों के आधार पर बदलाव न करने की सलाह
भारत द्वारा वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत ग्रोथ दर्ज करने के बाद उन्होंने पूरे साल के अनुमान में बदलाव करने से मना किया। उन्होंने कहा कि कई लोगों ने 7.8 प्रतिशत का आंकड़ा देखकर तुरंत अपने अनुमान बढ़ा दिए थे।
उन्होंने कहा कि वह ऐसा नहीं करते हैं क्योंकि उनके पास एक अनुमान और अनिश्चितता का दायरा होता है।
यूपीआई ट्रांजैक्शन और मर्चेंट डिस्काउंट रेट पर राय
यूपीआई ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर के मुद्दे पर विरमानी ने कहा कि शुरुआती सब्सिडी ने यूपीआई को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि अब इस नीति को कॉस्ट-बेस्ड सिस्टम की तरफ ले जाने की जरूरत है।
वर्तमान में एक निश्चित ट्रांजैक्शन लेवल से नीचे सपोर्ट बनाए रखने और उससे ऊपर इसे वापस लेने का तरीका सब्सिडी से बाहर निकलने का रास्ता है।
अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की चिंता और ट्रांजैक्शन पर असर
उन्होंने कहा कि कॉस्ट-बेस्ड सिस्टम की तरफ बढ़ने से इस चिंता को दूर करने में मदद मिल सकती है कि यूपीआई को सब्सिडी दी जा रही है। यह चिंता अंतरराष्ट्रीय पेमेंट कंपनियों की तरफ से थी।
एमडीआर से यूपीआई ट्रांजैक्शन पर असर के सवाल पर उन्होंने कहा कि ट्रांजैक्शन का बढ़ना जारी रहेगा। हालांकि यदि लागत आगे बढ़ाई जाती है तो इसका अस्थायी असर हो सकता है।