एआई वैल्यूएशन बबल फटने से भारत लौट सकते हैं फॉरेन इन्वेस्टर्स: अंबरीश बालिगा

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से जुड़े शेयरों में संभावित करेक्शन से फॉरेन इन्वेस्टर्स भारत वापस लौट सकते हैं। स्वतंत्र मार्केट एनालिस्ट अंबरीश बालिगा ने ANI के साथ बातचीत में यह जानकारी दी।
बालीगा ने बताया कि भारत एक व्यापक स्टॉक मार्केट है और लॉन्ग-टर्म ग्रोथ के अवसर प्रदान करता है। पिछले दो वर्षों में भारत से लगभग USD 45 बिलियन का फॉरेन इन्वेस्टर आउटफ्लो हुआ है।
- AI शेयरों में अत्यधिक उत्साह से वैल्यूएशन बहुत उच्च स्तर पर पहुंच गया है।
- भारत दुनिया का सातवां सबसे बड़ा स्टॉक मार्केट है।
- पिछले दो वर्षों में भारत से लगभग USD 45 बिलियन का आउटफ्लो हुआ है।
- फॉरेन इन्वेस्टर्स की होल्डिंग लगभग 23 प्रतिशत से घटकर लगभग 15 प्रतिशत हो गई है।
- रुपया हाल ही में पांच महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया है।
AI वैल्यूएशन और डॉट कॉम बबल की तुलना
AI को लेकर बढ़ती एक्साइटमेंट ने कुछ ग्लोबल बाजारों में वैल्यूएशन को बहुत ऊंचे स्तर पर पहुंचा दिया है। इससे एक तेज करेक्शन का जोखिम बढ़ गया है।
बालीगा ने AI के इर्द-गिर्द के मौजूदा उत्साह की तुलना डॉट कॉम बबल से की है। उन्होंने कहा कि वैल्यूएशन में संभावित गिरावट से फॉरेन इन्वेस्टमेंट का रुख भारत की ओर हो सकता है।
भारत का स्टॉक मार्केट और फॉरेन आउटफ्लो
भारत दुनिया का सातवां सबसे बड़ा स्टॉक मार्केट है और यह विभिन्न प्रकार के सेक्टरों में एक्सपोजर प्रदान करता है। अन्य बाजारों में फॉरेन मनी एक सीमित ग्रुप की AI से जुड़ी कंपनियों में केंद्रित रही है।
बालीगा ने बताया कि पिछले दो वर्षों में भारत से लगभग USD 45 बिलियन का फॉरेन इन्वेस्टर आउटफ्लो हुआ है। इसके बावजूद मार्केट क्रैश होने के बजाय करेक्ट हुआ है, जो सस्टेंड सेलिंग के बावजूद मार्केट की रेसिलिएंस को दर्शाता है।
ग्रोथ और करेंसी स्टेबिलिटी का महत्व
अगले एक से दो दशकों में भारत के ग्रोथ प्रोस्पेक्ट्स फॉरेन इन्वेस्टर के इंटरेस्ट को सपोर्ट कर सकते हैं। बालिगा की उम्मीद है कि इस अवधि के दौरान भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहेगा।
भारतीय इक्विटी में विचार कर रहे फॉरेन इन्वेस्टर्स के लिए एक स्टेबल रुपया महत्वपूर्ण होगा। करेंसी का अप्रिशिएट होना जरूरी नहीं है, लेकिन स्टेबिलिटी इन्वेस्टर कॉन्फिडेंस को बेहतर बनाने में मदद करेगी।
वेस्ट एशिया संकट और रुपये का अनुमान
वेस्ट एशिया संकट का संभावित समाधान फॉरेन फंड इनफ्लो के लिए एक और ट्रिगर हो सकता है। इससे इन्वेस्टर सेंटीमेंट में सुधार हो सकता है और अगली एक से दो तिमाहियों में फॉरेन इन्वेस्टर्स वापस आ सकते हैं, हालांकि टाइमिंग अनिश्चित है।
रुपया हाल ही में पांच महीने के निचले स्तर पर पहुंचा है। कुछ टेक्निकल एनालिस्ट्स का मानना है कि यह प्रति डॉलर 100 के आंकड़े के करीब पहुंच सकता है या उसे पार कर सकता है। हालांकि, बालिगा को उम्मीद है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया इस स्तर तक पहुंचने से पहले हस्तक्षेप करेगा। सकारात्मक ट्रिगर उभरने पर रुपया आने वाली एक या दो तिमाहियों में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग 93-94 पर रिकवर हो सकता है, जो उनका पूर्वानुमान है।
फॉरेन होल्डिंग्स और रिकवरी
फॉरेन सेलिंग कुछ समय तक जारी रह सकती है, लेकिन बालिगा को उम्मीद नहीं है कि भारतीय इक्विटी में फॉरेन इन्वेस्टर्स की हिस्सेदारी सिंगल डिजिट में गिरेगी।
फॉरेन होल्डिंग्स पहले ही लगभग 23 प्रतिशत से घटकर लगभग 15 प्रतिशत पर आ चुकी हैं। AI-related वैल्यूएशन में करेक्शन, रुपये में स्टेबिलिटी और ग्लोबल स्थितियों में सुधार मिलकर भारतीय बाजारों में फॉरेन इन्वेस्टर के इंटरेस्ट को फिर से बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।